चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के भारत की सरजमीं पर कदम रखने से पहले ही वहां से नई दिल्ली के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने का संदेश भेजा गया। भारतीय बाजार में गहरे पैठ बनाने की कोशिश कर रहे चीन ने नत्थी वीजा मामले में नीति बदलने का संदेश भेजकर भारत के साथ संबंधों को विश्वास बहाली की दिशा में मोड़ने की कोशिश की है। करीब 400 उद्योगपतियों के साथ दिल्ली आए जियाबाओ ने यह भी साफ कर दिया कि उनकी प्राथमिकता दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक रिश्तों को नए मुकाम पर पहुंचाने की है। दिल्ली पहुंचते ही जियाबाओ ने कहा, मेरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोस्ती को बढ़ाना, सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करना, पुरानी उपलब्धियों को आगे बढ़ाना और दोनों देशों के फायदे के लिए नए आयाम खोलना है। अक्टूबर में हनोई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ जियाबाओ की बैठक के दौरान भी व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ मुख्य तौर पर जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को चीन की तरफ से नत्थी वीजा दिए जाने पर भी चर्चा हुई थी। चीन के प्रधानमंत्री की इस यात्रा में सबसे अहम मुद्दा व्यापार का है। यही कारण है कि वह अब तक का सबसे बड़ा उद्योगपतियों का प्रतिनिधिमंडल लेकर आए हैं। ऐसे में कोशिश है दोनों देशों के बीच सहज संबंधों की दिशा में एक दूसरे के प्रति भरोसा पैदा करने पर। इसी कड़ी में भारतीय खेमे की कोशिशों के बाद चीन ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को नत्थी वीजा मसले पर अपनी नीति बदलने का भरोसा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और चीन के प्रतिनिधियों के बीच परदे के पीछे हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। चूंकि, जियाबाओ को दिल्ली से सीधे पाकिस्तान जाना है, लिहाजा अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं होगी। फार्मूले के मुताबिक धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर के लोगों को नत्थी वीजा के बजाय मुहर के साथ वीजा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बीजिंग से इस सकारात्मक संदेश के बाद जब दिल्ली के हवाई अड्डे पर जियाबाओ न सिर्फ बेहद खुशगवार मिजाज में उतरे, बल्कि स्वागत के लिए तैनात वाणिज्य राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ वह बेहद गर्मजोशी के साथ पेश आए। हवाई अड्डे से वह सीधे दोनों देशों के उद्योगपतियों की अहम बैठक में गए तो वहां भी जियाबाओ का रुख बेहद सकारात्मक था। रात को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जियाबाओ की शान में व्यक्तिगत भोज भी दिया। गुरुवार को जियाबाओ का बेहद व्यस्त दिन होगा। सवेरे राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात के बाद वह राजघाट जाएंगे। इसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तरीय कई चक्र बातचीत और संयुक्त बयान जारी होगा। इसके बाद वह भारत-चीन संबंधों वह रोशनी डालेंगे तो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक बंध भी मजबूत करेंगे। उनकी मुलाकात संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से भी होगी।
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