Thursday, December 23, 2010

भारत को स्थायी सदस्यता मिलना आसान नहीं

रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलना भारत के लिए आसान नहीं होगा। बुधवार को यहां आइआइटी मुंबई के छात्रों से मुखातिब रूसी राष्ट्रपति ने हालांकि यह भी कहा कि रूस स्थायी सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि आजादी के कुछ साल बाद आइआइटी मुंबई की स्थापना रूस के ही सहयोग से हुई थी। पिछले माह मुंबई आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तर्ज पर रूसी राष्ट्रपति का भी छात्रों के साथ प्रश्नोत्तर का कार्यक्रम रखा गया था। एक छात्र ने पूछा कि क्या रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन किया है? इस पर मेदवेदेव ने कहा, रूस का समर्थन तो भारत के साथ है। इसके बावजूद स्थायी सदस्यता पाना भारत के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए सबकी सहमति जरूरी होगी। यह पूछे जाने पर कि यदि कभी भारत को पाकिस्तान के विरुद्ध रूसी मदद की जरूरत पड़े तो रूस का क्यारुख होगा? रूसी राष्ट्रपति ने रूस और भारत की पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए कहा कि आतंक के विरुद्ध लड़ाई में भारत जो मदद रूस से चाहेगा, रूस उसके लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर वह भारत का समर्थन करता रहेगा। बुधवार को ही रूस के राष्ट्रपति ने आगरा में ताजमहल को भी देखा।


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