Wednesday, December 22, 2010

रूस के साथ आपसी सहयोग की नई पारी

भारत और रूस ने एक दशक पुरानी अपनी रणनीतिक साझेदारी को नए पायदान पर ले जाने का खाका पेश किया है। सालाना शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्ते को खास अधिकारों वाली रणनीतिक साझेदारी बताते हुए आपसी सहयोग की नई पारी का आगाज रक्षा, ऊर्जा और उद्योग क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक नए करारनामों के साथ किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच मंगलवार को हुई शिखर बैठक ने अगले पांच सालों के भीतर आपसी व्यापार को 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। उल्लेखनीय है कि गहरे रिश्तों के बावजूद भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी दस अरब डॉलर है। जबकि इसके मुकाबले चीन के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा ही 45 अरब डॉलर से अधिक का है। रणनीतिक रिश्तों के साथ ही व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने की कवायद में करीब दो घंटे की शिखर वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा, तेल व प्राकृतिक गैस, फार्मा, वीजा सुधार, सूचना प्रौद्योगिकी तथा वैज्ञानिक शोध समेत कई क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। साझा पत्रकार वार्ता के मंच से रूसी अहमियत को तवज्जो देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा कि भारत के वैज्ञानिक और औद्योगिक ढांचे को खड़ा करने में सबसे पहले रूस ने हमारी मदद की है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों को अन्य किसी भी देश के साथ भारत के रिश्तों से अलग बताते हुए इसे अहम और विशेष अधिकार प्राप्त साझेदारी करार दिया। गौरतलब है कि भारत की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था और नई दिल्ली के दरवाजे पर बढ़ रही भीड़ के बीच मॉस्को की कोशिश अपने खास दर्जे को भुनाने की ही है। ऐसे में अपनी अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने में लगे मेदवेदेव का सारा जोर द्विपक्षीय व्यापार की कमजोरी को दूर करने और भारतीय बाजार में रूसी मौजूदगी को बढ़ाने पर था। करारों की फेहरिस्त में शामिल ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) और रूसी तेल कंपनी सिस्टेमा के बीच हुए करार पर विशेष खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए काफी समय से प्रयास जारी थे। यह समझौते दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल को दिखाते हैं। माना जा रहा है कि सिस्टेमा और ओवीएल को एक-दूसरे की निवेश परियोजनाओं में हिस्सेदारी दिलाने वाले इस समझौते के बाद अगले साल रूस के तेल भंडार के लिए बोली में भारत की स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा सालाना शिखर वार्ता की इस कड़ी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति मेदवेदेव के बीच हुई तीसरी मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों में अहम भूमिका निभाने वाले रक्षा और नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण सहयोग समझौतों की गाड़ी को भी आगे बढ़ाया। सहयोग की कड़ी में रूस को अपने फार्मा उद्योग के विकास में भारत की मदद मिलेगी।

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