Friday, December 31, 2010

भारत के आयोग भेजने के प्रस्ताव पर पाक की आनाकानी

 मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं से पूछताछ के लिए आयोग पाकिस्तान भेजने संबंधी भारत के प्रस्ताव पर पाक सरकार ने आनाकानी शुरू कर दी है। प्रस्ताव भेजे जाने के कुछ दिनों बाद ही गुरुवार को पाकिस्तान सरकार की तरफ से कहा गया है कि भारतीय आयोग को यहां आकर संदिग्धों से पूछताछ करने की कोई कानूनी जरूरत नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा कि भारत में जिंदा पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब और हमले की जांच कर रहे अधिकारियों से पूछताछ के लिए पाकिस्तान की ओर से आयोग भेजने के प्रस्ताव की कानूनी जरूरत है ताकि संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारतीय आयोग के यहां आकर मुंबई हमले से जुड़े संदिग्धों से पूछताछ करने की कोई कानूनी जरूरत नहीं है। बासित ने कहा कि हमारे न्यायिक आयोग का भारत जाना एक कानूनी जरूरत है ताकि मुंबई हमले से जुड़े मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सके। जहां तक भारत का प्रस्ताव है, उसकी हमें कोई कानूनी जरूरत नजर नहीं आ रही है। बासित साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। पूछताछ के बारे में नई दिल्ली और इस्लामाबाद के आग्रहों पर उन्होंने कहा कि हमारा आग्रह और भारत का प्रस्ताव दोनों अलग हैं। इन दोनों को अलग परिपे्रक्ष्य में देखने की जरूरत है। हम भारत के प्रस्ताव पर अपने कानूनों के मुताबिक विचार करेंगे। भारत की ओर से यह पेशकश की गई थी कि वह लश्कर-ए-तैयबा के स्वयंभू कमांडर जकीउर रहमान लखवी सहित मुंबई हमले के सभी साजिशकर्ताओं से पूछताछ के लिए एक आयोग पाकिस्तान भेजना चाहता है ताकि इस जघन्य हमले के षड्यंत्रकारियों के आवाज के नमूने लिए जा सकें। इससे पहले पाकिस्तान ने प्रस्ताव दिया था कि वह कसाब और मामले से संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के लिए एक आयोग भारत भेजना चाहता है। आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए कसाब और अन्य लोगों से पूछताछ करना आवश्यक है।

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