बीते कुछ दिन पहले तक भले ही चीनी सेनाओं का भारतीय भूभाग में घुसपैठ का मुद्दा सुर्खियों में छाया रहा हो मगर हाल में देश की सर्वोच्च खुफिया एजेंसी ने भारत नेपाल सीमा पर कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे चीनी लर्निंग सेंटर (सीएलसी) के बारे में जो चेतावनी दी है वह ज्यादा गंभीर मामला है। अब तक भारत नेपाल सीमा पर एक दर्जन ऐसे स्टडी सेंटर खुल चुके हैं। हालांकि 15 दिन पहले तक बोर्ड लगाकर चलाए जा रहे इन स्टडी सेंटर्स के बोर्ड खुफिया तंत्र की सक्रियता के बाद उतरने लगे हैं पर पढ़ाई जारी है। खुफिया एजेंसियों की चिंता यह है कि ये सारे सेंटर भारत नेपाल सीमा पर खोलने का बढ़ावा देकर चीन अपनी उपस्थिति का एहसास कराने के साथ टोह भी ले रहा है।
भारत नेपाल सीमा पर खुले स्टडी सेंटर्स की संख्या 11 है। इनमें बुटवल, लुंबिनी, नेपालगंज, सांखू सभा, बिराटनगर, विराथामू, पोखरा, मोरंग, सुंसरी और चितवन प्रमुख हैं। इन केंद्रों में नेपालगंज उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से चार किलोमीटर दूर, बुटवल महराजगंज के सोनौली से 25 किलोमीटर और लुंबिनी सिद्थार्थनगर से 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। नवलपराशी से नेपालगंज तक लगभग 225 किलोमीटर लंबी भारत नेपाल सीमा में सात केंद्र चल रहे हैं। ये सेंटर 2005 में हुई नेपाल चीन संधि के बाद से तेजी से अस्तित्व में आ रहे हैं। इन सेंटरों के संबध में खुफिया तंत्र का सवाल है कि ये सेंटर केवल भारत नेपाल तराई सीमा पर ही क्यों? चीन नेपाल सीमा पर क्यों नहीं खोले जा रहे हैं। दरअसल सीएलसी और नेपाल चाइना फ्रेंडशिप एसोसिएशन, नेपाल की इंटेलिजेंस एजेंसी राष्ट्रीय अनुसंधान और चीनी एजेंसियों में सूचना के आदान प्रदान और डाटा एकत्र करने को लेकर बेहद तालमेल और जुगलबंदी है। ये भारत नेपाल सीमा पर रह रहे तिब्बती शरणार्थियों की गतिविधियों की बेहतर तालमेल के साथ निगहबानी कर रहे हैं। उनका यह गठजोड़ उत्तर प्रदेश और बिहार के माओवादियों के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। आने वाले दिनों में इसके दुष्परिणाम दिखेंगे।
सूत्रों के मुताबिक चीनी भाषा और संस्कृति के प्रति नेपाली बच्चों में रुचि जागृत करने और भारतीय सीमा पर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराने की गरज से ही नेपाल में सितंबर में चीनी भाषा का प्रथम एंबेसडर कप आयोजित किया गया था जिसमें कोई 200 नेपाली बच्चों ने भाग लिया था। नेपाल में किस कदर चीन का हस्तक्षेप बढ़ रहा है इसके संकेत नेपाल में चीन के राजदूत कुओ गुआंग के भाषण में देखे जा सकते हैं। गुआंग ने बीते माह नेपाल के एक आयोजन में कहा था ‘नेपाल की संप्रभुता और एकता खतरे में है। ऐसे में चीन न केवल उसे सैनिक सहायता देगा बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक मदद भी करेगा।’ यही नहीं ल्हासा और काठमांडू को जोड़ने के लिए 100 मिलियन डालर से एक सड़क का भी निर्माण करा रहा है।
चिंता का विषय
महाराजगंज से बहराइच तक की नेपाली सीमा पर एक दर्जन केंद्र खुले
2005
नेपाल चीन संधि के बाद इन सेंटरों का निर्माण तेजी से हुआ
घातक गठजोड़
यह गठजोड़ उत्तर प्रदेश और बिहार के माओवादियों के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। आने वाले दिनों में इसके दुष्परिणाम दिखेंगे।
No comments:
Post a Comment