वर्ष 2010 लेखा जोखा
मास्को (एजेंसी)। भारत और रूस के वर्षों पुराने रिश्तों के लिहाज से यह साल बेहतरीन रहा। राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के बीच व्याप्त संदेह के बादल पूरी तरह छंट गए और परस्पर द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिली। मेदवेदेव साल के आखिर में दिल्ली पहुंचे और इस दौरान दोनों राष्ट्रों के बीच अरबों डॉलर के समझौते हुए। इसमें पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकसित करने संबंधी 29.5 करोड़ डॉलर का करार हुआ। इसके अलावा 29 अन्य समझौतों पर भी दस्तखत किए गए। हाल के वर्षों में अमेरिका के प्रति भारतीय विदेश नीति के झुकाव को देखते हुए मास्को और नई दिल्ली के बीच पुराने रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं, लेकिन रूसी राष्ट्रपति के दौरे ने इन पर विराम लगाया और फिर से साबित कर दिया कि भारत और रूस के रिश्तों की डोर बेहद मजबूत है। एडमिरल गोर्शकोव की कीमत के मुद्दे पर भी दोनों के बीच कुछ तनातनी पहले दिखी थी, लेकिन संयुक्त बयान में सामरिक साझेदारी से जुड़ी सभी अकटलें खत्म हो गईं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्वदेशी अत्याधुनिक पनडुब्बी और नयी पीढ़ी के विमानों के निर्माण को लोकर भारत अपने पुराने मित्र राष्ट्र पर ही निर्भर कर सकता है। इससे पहले मार्च में रूसी प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन ने भारत का दौरा आशावादी द्विपक्षीय रिश्तों की बुनियाद को मजबूती दी थी। ‘सेंटर फार इंडियन स्टडीज’ की डॉक्टर तातियाना शौम्यन ने कहा, दोनों देश के रिश्तों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मैं यह सकती हूं कि मेदवेदेव और पुतिन की यात्राएं ऐतिहासिक मानी जाएंगी। दोनों देशों आर्थिक सहयोग को भी नई ऊंचाइयां प्रदान करने पर सहमत हुए हैं। दोनों ने वर्ष 2015 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
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