चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा को विश्वास बहाली के लिहाज से अहम माना जा रहा था। दुर्भाग्य से उनकी यात्रा खत्म होने के कुछ दिन बाद चीन से दो खबरें आई, जिन्होंने भारत-चीन रिश्तों में अविश्वास की बात को फिर हवा दे दी। पहले चीन ने भारत के साथ लगती सीमा को 2000 किलोमीटर बताया। भारत इसकी लंबाई 3488 किलोमीटर बताता रहा है। सीमा की लंबाई 2000 किलोमीटर बताने का मतलब यह है कि चीन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग बताने की कोशिश कर रहा है। उस पर रविवार को चीन में भारत के राजदूत एस जयशंकर ने हैरान करने वाला बयान दे डाला। उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर के निवासियों को नत्थी वीजा देने के मसले पर भारत-चीन सहमति की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों देश इस संबंध में परस्पर बैठकों के दौर जारी रखेंगे। विशेषज्ञ इन दोनों खबरों को विरोधाभासी मान रहे हैं। उनका कहना है कि चीन ने भारत से लगती सीमा को 2000 किलोमीटर बताकर जम्मू-कश्मीर को अलग बताने की कोशिश की है। ऐसे में नत्थी वीजा पर सहमति की बात करना ठीक नहीं। गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत ने अभी तक सीमा की लंबाई से संबंधित चीनी विवेचना पर बयान तक नहीं दिया। इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के रिसर्च फेलो अजय लेले कहते हैं, भारत सरकार को चीन के इस रुख पर कड़ा अपनाना चाहिए। चीन जो कहा, उसका खंडन करके उससे यह भी पूछा जाना चाहिए कि वह किस आधार ऐसी बातें कर रहा है। इससे पहले चीनी समाचार पत्र पीपुल्स डेली व द ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि भारत के साथ चीन की सीमा की लंबाई 2000 किलोमीटर है। भारत इसकी लंबाई 3488 किलोमीटर बताता रहा है। भारत, चीन के मध्य सीमा को लेकर जारी विवाद के बीच चीन के सरकारी स्वामित्व वाले मीडिया ने भारतीय भूमि के 1600 किलोमीटर क्षेत्र पर देश के दावे के लिए आधार तैयार करना शुरू कर दिया है। सीमा की लंबाई संबंधित खबरें चीन के सरकारी मीडिया में प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की 15 से 17 दिसंबर तक होने वाली भारत यात्रा से पहले आई थीं। हालांकि ग्लोबल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में जयशंकर ने भारत की स्थिति स्पष्ट की है। सीमा पर कथित तनाव के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, सीमा की स्थिति को चिंताजतक ढंग से पेश किए जाने के बजाय भारत-चीन में वास्तविकता बिल्कुल विपरीत है। हमारी 3488 किमी लंबी साझा सीमा है।
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