वैश्विक बौद्ध सम्मेलन के विरोध में सीमा विवाद पर भारत के साथ वार्ता से मुकरे चीन ने एक बार फिर दलाई लामा समर्थक देशों को चेताया है। सीमा विवाद पर वार्ता टलने के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए बीजिंग ने कहा है कि वह दलाई लामा और उनकी चीन विरोधी गतिविधियों को मंच प्रदान करने वाले किसी भी देश का विरोध करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में ने कहा कि दलाईलामा कोई आध्यात्मिक गुरू नहीं हैं और वे लंबे समय से अध्यात्म की आड़ में अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं। हालांकि होंग ने कहा कि सीमा विवाद पर वार्ता की नई तारीख तय करने के लिए चीन नई दिल्ली के संपर्क में है। गौरतलब है कि नई दिल्ली में हो रहे वैश्विक बौद्ध सम्मेलन को चीन विरोधी समागम की संज्ञा देते हुए बीजिंग ने इसे रद करने की मांग भारत के सामने रखी थी। मांग खारिज होने के बाद चीन ने सीमा विवाद पर 28-29 नवंबर को होने वाली वार्ता में शामिल होने से इंकार कर दिया था। चीन ने बौद्ध सम्मेलन में दलाई लामा का संबोधन रोके जाने की मांग भी भारत से की थी। पड़ोसी मुल्क ने किसी भी देश की ओर से चीन विरोधी गतिविधियों को मंच देने का भी विरोध किया था।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कहा कि दोनों देश सीमा विवाद मामले पर वार्ता का समय और एजेंडा तय करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश चीन-भारत सीमा विवाद मामले पर विशेष प्रतिनिधियों की 15वीं बैठक पर बहुत ध्यान दे रहा है। इस वक्त दोनों देश बैठक के लिए तारीख तय करने में लगे हैं। यह पूछने पर कि क्या चीन ने नई दिल्ली में होने वाले बौद्ध सम्मेलन, जिसे तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा संबोधित करने वाले थे, को रद करने के लिए भारत पर दबाव बनाया था। होंग ने कहा कि वह बताना चाहते हैं कि दलाई लामा विशुद्ध आध्यात्मिक गुरू नहीं हैं वह लंबे समय से अध्यात्म की आड़ में अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी भी रूप में चीन विरोधी गतिविधियों को मंच प्रदान करने वाले देश का विरोध करते हैं। यह पूछने पर कि क्या भारत ने वार्ता टालने पर कुछ कहा है और चीन की क्या आशाएं हैं, होंग ने कहा कि दोनों पक्ष सीमा विवाद बैठक से जुड़े मुद्दों पर बात कर रहे हैं और साथ ही उसके लिए विशेष एजेंडा भी बना रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और चीन के शीर्ष राजनयिक दाई बिंगुओं के बीच होने वाली वार्ता रद होने का मसला भारत में छाया रहा। हालांकि चीन के आधिकारिक समाचार पत्रों, चैनलों या वेबसाइट में इस बारे में कुछ नहीं प्रकाशित हुआ।
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