भारतीय अधिकारियों ने श्रीलंका में 2002 में हुए संघर्ष विराम से पहले लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से गोपनीय मुलाकात की थी, जबकि भारत लिट्टे को आतंकवादी मानता था। यह खुलासा नार्वे सरकार के मंत्री एरिक सोल्हेम ने किया है। सोल्हेम श्रीलंका में नार्वे के राजदूत भी रह चुके हैं। उन्होंने 2008 में जारी हुई आइएएनएस की रपट की पहली बार पुष्टि करते हुए कहा कि भारत ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच नौ वर्ष पहले संघर्ष विराम समझौता कराने में पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई थी। सोल्हेम ने यहां अपने कार्यालय में सप्ताहांत में आइएएनएस के साथ बातचीत में लिट्टे से संबंधित तमाम जानकारियां दीं। इसके पहले उन्होंने बैठक को संबोधित किया था जिसमें श्रीलंका की शांति प्रक्रिया में नार्वे की भूमिका पर एक रपट जारी हुई थी। सोल्हेम के अनुसार, पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री व भारतीय अधिकारियों ने फरवरी 2002 में संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले लिट्टे के साथ गुप्त बैठक की थी। सोल्हेम ने यह बताने से इंकार कर दिया कि बैठक कहां हुई थी और दोनों पक्षों से बैठक में किन-किन लोगों ने हिस्सा लिया था। यदि यह बात सच है तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद नई दिल्ली द्वारा 1992 में लिट्टे को प्रतिबंधित किए जाने के बाद से लिट्टे और भारतीय अधिकारियों के बीच यह पहली ज्ञात बैठक मानी जाएगी। सोल्हेम ने यह भी कहा कि जाहिर जानकारी के विपरीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने नार्वे प्रायोजित संघर्ष विराम की व्यूह रचना में परदे के पीछे एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। सोल्हेम ने कहा कि उन्होंने स्वयं भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और भारतीय खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) के अधिकारियों के साथ कई बैठकें की थीं, क्योंकि श्रीलंका और लिट्टे ने सघर्ष विराम की तरफ कदम बढ़ाए थे। उन्होंने कहा कि रॉ के कुछ अधिकारियों के साथ नई दिल्ली हवाईअड्डे पर उनकी बैठक हुई थी। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने श्रीलंका संघर्ष विराम में भारत की गुप्त भूमिका पर रपट तो जारी की थी, लेकिन उसमें रॉ का जिक्र नहीं किया था, क्योंकि संघर्ष विराम में रॉ की भूमिका के बारे में जिन सूत्रों ने विवरण मुहैया कराए थे, उन्होंने रपट में रॉ का जिक्र न करने का अनुरोध किया था। तब तक संघर्ष विराम नार्वे की विशेष उपज के रूप में ही जाना जाता था।
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