Monday, November 7, 2011

भारत को तरजीही देश का दर्जा देने से मुकरा पाकिस्तान

भारत को सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा (एमएफएन) देने के फैसले के बाद अमेरिका से शाबासी पाने वाला पाकिस्तान अचानक मुकर गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने अपनी कैबिनेट के बुधवार के फैसले से पीछे हटते हुए साफ किया कि इस्लामाबाद ने अभी भारत को एमएफएन का दर्जा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय को द्विपक्षीय बातचीत में सिर्फ इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है। माना जा रहा है कि गिलानी ने यह बयान पाकिस्तानी सेना के दबाव के चलते दिया है। हालांकि एमएफएन के दर्जे पर पाकिस्तान से अलग-अलग बयान आ रहे हैं। गिलानी ने भी सफाई दी कि इस मामले में सेना शामिल नहीं है। गिलानी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शुक्रवार को ही जी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 15 साल बाद भारत को दिए गए एमएफएन के दर्जे पर पाकिस्तान के फैसले का स्वागत तक कर दिया था। अमेरिका से भी पाकिस्तान को इस मसले पर शाबाशी मिल चुकी है। भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक भी कह चुके हैं कि इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं है। गौरतलब है कि ऐसी खबरें आईं थीं कि पाकिस्तान की कैबिनेट ने भारत को एमएफएन का दर्जा देने का फैसला किया है। इसी दिन पाकिस्तानी सूचना मंत्री फिरदौस अवान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सेना और रक्षा संस्थानों सहित सभी भागीदार एमएफएन के मुद्दे पर सहमत हैं। यही नहीं सबसे तरजीही देश का दर्जा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के वाणिज्य सचिव इसी महीने दिल्ली दौरे पर आने वाले हैं। व्यापार संबंधों को सामान्य करने के मुद्दे पर एक रोज पहले ही पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने आइएसआइ प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा सहित सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। गिलानी ने अपने निवास पर पत्रकारों से मुखातिब शुक्रवार देर रात बताया कि कैबिनेट ने इस मुद्दे पर केवल आगे बढ़ने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। अगर स्थिति अनुकूल और देश हित में रही तो ही इसे मंजूरी दी जाएगी। नहीं तो इस पर कार्यवाही को रोक दिया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय को व्यापार नीति पर भारत के साथ बातचीत में स्वतंत्र रूप से निर्णय करना है। इसलिए उसने इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए कैबिनेट से मंजूरी मांगी थी।

No comments:

Post a Comment