Saturday, November 26, 2011

मिस्र : जनता का सेना को अल्टीमेटम

मिस्र में सत्तारूढ़ जनरलों के नए प्रधानमंत्री नियुक्त करने जैसे कदमों को नामंजूर करते हुए यहां तहरीर चौराहे पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने सैन्य जनरलों को सत्ता नागरिकों को सौंपने का अंतिम अवसरअल्टीमेटम दिया। इसी बीच एक अप्रत्याशित कदम के तहत अल अजहर के वयोवृद्ध इमाम सुन्नियों के सर्वोच्च धार्मिक नेता ने तहरीर चौराहे पर करीब एक सप्ताह से एकत्रित प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है। इमाम के एक सहयोगी ने प्रदर्शनकारियों से कहा, वयोवृद्ध इमाम शेख अहमद अल तैयब आपका समर्थन करते हैं और आपकी जीत की कामना करते हैं। इन नवीनतम प्रदर्शनों के साथ ही पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शनकारियों और दंगोरोधी पुलिसकर्मियों के बीच संघर्ष में 41 लोग मारे गए हैं और 3000 से अधिक घायल हुए हैं। तहरीर चौराहे पर ही सबसे अधिक हिंसा हुई है जो उस आंदोलन का केंद्र रह चुका है जिसने फरवरी में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल कर दिया था। चौराहे पर प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि शुक्रवार का प्रदर्शन लाखों लोगों के लिए अंतिम अवसर है यानी सैन्य शासकों के पास उनकी मांग पर झुक जाने के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। इमाम शेख मजहर शाहीन ने सत्तारूढ़ सर्वोच्च सशस्त्र बल परिषद से सत्ता राष्ट्रीय मुक्ति सरकार को सौंपेने की अपील की और कहा कि जब तक ऐसा नहीं होगा, प्रदर्शनकारी यहां से टस से मस नहीं होगे। इससे पहले दिन में मीडिया ने खबर दी थी कि नागरिक सरकार की प्रदर्शनकारियों की मांग के प्रति रियायत बरतते हुए परिषद ने पूर्व प्रधानमंत्री कमाल अल-गंजुरी को नया मंत्रिमंडल गठित करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। अपदस्थ राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के शासनकाल में वर्ष 1996 से 1999 तक प्रधानमंत्री के पद पर रह चुके अर्थशास्त्री कमाल सैन्य परिषद् प्रमुख फील्ड मार्शल मुहम्मद हुसैन तंतावी से मुलाकात के बाद नई सरकार के प्रमुख बनने पर राजी हो गए हैं। मुबारक शासन से दूरी बनाने वाले गंजूरी को राष्ट्रपति पद के भी दावेदार माने जा रहे हैं। सैन्य परिषद ने मंगलवार को कार्यवाहक प्रधानमंत्री एसाम शराफ के मंत्रिमंडल का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। बृहस्पतिवार को सैन्य शासकों ने शनिवार से अब तक हिंसा में मारे गए लोगों के लिए माफी मांगी और अपराधियों को दंडित करने का निश्चय किया। अशांति का आज सातवां दिन है। सैन्य शासकों ने कहा कि वे नागरिकों को सत्ता सौंप देंगे लेकिन इसमें हड़बड़ी नहीं होनी चाहिए ताकि अराजकता न फैले। मुबारक के अपदस्थ होने के बाद सोमवार को मिस में पहली बार संसदीय चुनाव होने वाले हैं। सैन्य परिषद् के मेजर जनरल ममदौह शाहीन ने बृहस्पतिवार को यहां कहा था कि चुनाव का कार्यक्र म तय योजना के अनुसार चलेगा और प्रदर्शनकारियों को आासन दिया था कि उनके साथियों की हत्या करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने वालों को सजा मिलेगी। सोमवार को होने वाले चुनाव में भारी हिंसा की आशंका जताई गई है। जहां जहां तहरीर चौराहे पर सैकड़ों लोग परिषद के खिलाफ प्रदर्शन कर रहें है वहीं अब्बासियो में हजारों लोगों ने परिषद से सत्ता में बने रहने की मांग करते हुए रैली निकाली। इसी बीच अमेरिकी व्हाइट हाऊस के प्रवक्ता जय कार्नी ने कहा, हम विास करते हैं कि नागरिक सरकार को सत्ता का हस्तांतरण उचित और समग्र तरीके हो और यह मिस की जनता की आकांक्षाओं का यथासंभव पूरा करे। राष्ट्रीय मुक्ति सरकार का संभावित हिस्सा बताए जा रहे संयुक्त राष्ट्र के पूर्व परमाणु निगरानी प्रमुख मोहम्मद अलबरदेई भी तहरीर चौराहे पहुंचे।

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