अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी के इस्तीफे के बाद उनकी जगह पूर्व सूचना मंत्री शेरी रहमान को नियुक्त किया गया है। शेरी दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के काफी करीब थीं। संभावित सैन्य तख्तापलट के डर से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा अमेरिका को सौंपे गए गुप्त ज्ञापन से नाम जुड़ने के बाद हक्कानी ने मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के कार्यालय ने बुधवार को बतौर राजदूत शेरी की नियुक्ति की घोषणा की। इससे कुछ देर पहले ही शेरी ने गिलानी से मुलाकात की थी। सेना के साथ संबंधों के चलते विदेश सचिव सलमान बशीर का नाम भी इस पद के लिए लिया जा रहा था, लेकिन बाजी शेरी मार ले गई। सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के शीर्ष नेतृत्व से मनमुटाव के बाद 50 वर्षीया शेरी ने मार्च, 2009 में सूचना मंत्री का पद छोड़ दिया था। यहां तक कि मीडिया के साथ सरकार के संबंधों को लेकर जरदारी के साथ भी उनके मतभेद थे। मगर पिछले कुछ महीनों में उन्होंने फिर से मुख्यधारा में आने के लिए पार्टी के साथ अपने संबंधों को पटरी पर लाने के प्रयास शुरू कर दिए थे। वह अपना एक गैर सरकारी संगठन जिन्ना इंस्टीट्यूट चलाती हैं। इसके जरिए वह भारत और अफगानिस्तान के साथ रिश्तों सहित विदेश नीति से जुड़े कई मुद्दों पर भूमिका निभाती रही हैं। पीएमएल-एन जांच की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंची पाकिस्तान में ज्ञापन मामले के कारण पैदा हुए विवाद पर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर मामले की जांच की मांग की। पीएमएल-एन के इस कदम को सरकार को घेरने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी प्रमुख नवाज शरीफ के वकील की तरफ से दायर इस याचिका में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, संघीय सरकार, सैन्य और आइएसआइ प्रमुखों और विदेश सचिव को पक्ष बनाया है। इस याचिका में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी और पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी व्यापारी मंसूर एजाज को भी नामित किया गया है। इस याचिका में एजाज द्वारा किए गए खुलासे का हवाला देते हुए न्यायालय से मांग की गई है कि वह राष्ट्रपति जरदारी और हक्कानी को यह स्पष्ट करने का निर्देश दे कि उन्होंने शुरूआत में एजाज द्वारा किए गए दावों को क्यों खारिज कर दिया था। इसके साथ याचिका में यह दावा भी किया गया कि राष्ट्रहित में उच्चतम न्यायालय को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
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