Monday, November 28, 2011

दक्षिण चीन सागर में उलझा रिश्तों का पुल


दक्षिण चीन सागर को लेकर भारत और चीन के मतभेदों ने रिश्तों की गाड़ी को फिर से ब्रेक लगाना शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में सोमवार से शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में दलाई लामा की शिरकत का बहाना बना चीन ने जिस तरह सीमा वार्ता टाली है, उससे कतार में खड़े अन्य कूटनीतिक कार्यक्रमों पर आशंका के बादल घिरने लगे हैं। महत्वपूर्ण है कि चीन और भारत वार्षिक रक्षा वार्ता के लिए नौ दिसंबर की तारीख तय कर चुके हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक बीजिंग की ओर से इनमें फेरबदल के लिए अभी तक कोई सूचना नहीं है। लेकिन चीन की ओर से जिस तरह एन मौके पर 28-29 नवंबर को होने वाली 15वें दौर की सीमा वार्ता को टाला गया उसने आशंकाएं जरूर खड़ी कर दी हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर तल्खी के चलते दोनों देश बीते तीन सालों में साझा सैन्य अभ्यास की जमीन तैयार नहीं कर पाए। वहीं अगस्त 2010 में एक भारतीय जनरल को चीन का वीजा देने से इंकार के बाद भारत ने नाराजगी जताते हुए चीन के साथ करीब आठ महीने तक अपने सैन्य रिश्तों को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला लिया था। चीन मामलों के विशेषज्ञ प्रो. श्रीकांत कोंडापिल्लै कहते हैं कि विशेष प्रतिनिधि स्तर सीमा वार्ता से इंकार को लेकर चीन ने बहाना भले ही बौद्ध सम्मेलन का बनाया हो, लेकिन इसकी जड़ में दक्षिण चीन सागर को लेकर जारी रस्साकशी ही है। उन्होंने बताया कि इस तरह वार्ता की मेज से हटना चीन के लिए कोई नया नहीं है। इससे पहले 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद डेढ़ साल तक दोनों मुल्कों के बीच सीमा मामले पर कोई वार्ता नहीं हुई थी। इतना ही नहीं बीते एक दशक में भी कई बार विशेष प्रतिनिधि स्तर वार्ता की तारीखें निर्धारित कैलेंडर से पिछड़ती रही हैं। वैसे दोनों देश सीमा विवाद सुलझाने के लिए बीते तीन दशक में 36 दौर की वार्ता कर चुके हैं। दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बौद्ध सम्मेलन को निरस्त करने की चीन की मांग के आगे नहीं झुकने पर केंद्र सरकार की सराहना की है। इस आयोजन में तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा भी संबोधित करेंगे। उमर ट्वीट किया कि यह देखकर अच्छा लगा कि भारत सरकार ने चीन को स्पष्ट जवाब दिया है। चीन ने मांग की थी कि नई दिल्ली में कल से शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन को स्थगित कर दिया जाए, जिसमें बुधवार को दलाई लामा भी शामिल होंगे। नई दिल्ली के इंकार के बाद चीनी पक्ष ने दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के 15वें दौर को रद कर दिया। चीन की हरकतों से रहें खबरदार : फारूक अब्दुल्ला कठुआ, वरिष्ठ संवादददाता : सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख एवं केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि चीन एक तरफ भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है तो दूसरी ओर सीमाओं पर साजिश रच रहा है। हमें ऐसे देशों से खबरदार रहते हुए राष्ट्र की अखंडता के लिए एकजुट होकर काम करना है। जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट अंग है और हमेशा रहेगा। उन्होंने रिटेल कारोबार में विदेशी निवेश को मंजूरी देने के सरकार के फैसले पर सहमति भी जताई।

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