Monday, November 28, 2011

चीनी उपराष्ट्रपति के भारत दौरे पर दलाई लामा का साया


तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की एक बौद्ध सम्मेलन में उपस्थिति पर उभरे मतभेदों के कारण चीन के उपराष्ट्रपति झी जिनपिंग के प्रस्तावित भारत दौरे पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। चीन के विशेष प्रतिनिधि दई बिंगुओ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ 15वें दौर की सीमा वार्ता के लिए सोमवार को दिल्ली आने वाले थे। लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। इस वार्ता के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के बीच झी जिनपिंग के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी चर्चा होने की संभावना थी। गौरतलब है कि जिनपिंग अगले वर्ष पद से हट रहे चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ का स्थान ले सकते हैं। जिनपिंग के दौरे की तारीखें हालांकि अभी तक तय नहीं हो पाई हैं, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि वे जनवरी में भारत का दौरा कर सकते हैं। भारत जिनपिंग के जोरदार स्वागत के लिए उत्सुक है, ताकि अगले वर्ष हू के पद छोड़ने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के पांचवीं पीढ़ी के नेतृत्व के साथ सामंजस्य स्थापित किया जा सके। जिनपिंग शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं। लेकिन दलाई लामा को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण सीमा वार्ता स्थगित होने से अब जिनपिंग के दौरे पर भी सवाल उठने लगा है। गौरतलब है कि 28-29 नवंबर को होने वाली सीमा वार्ता स्थगित कर दी गई, क्योंकि भारत ने चीन की उस मांग को मानने से इंकार कर दिया था, जिसमें उसने चार दिवसीय वैश्विक बौद्ध सम्मेलन को रद करने के लिए कहा था। इस सम्मेलन में दलाई लामा समापन भाषण देने वाले थे। समझा जाता है कि भारत ने अपने इस रुख से चीन को अवगत कराया कि दलाई लामा एक धर्मगुरु और सम्मानित अतिथि हैं, लिहाजा वह धार्मिक मुद्दों पर बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि चीन ने इस पर अपना रुख कड़ा करते हुए सम्मेलन रद करने की मांग की, लेकिन भारत ने झुकने से इंकार कर दिया। तिब्बत समाधान के लिए ढूंढे बीच का रास्ता : सांगेय धर्मशाला, एजेंसी : तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय ने कहा कि चीन चीनी राज्य के अधीन स्वायत्तता के लिए बीच का रास्ता निकालने में तिब्बत की मदद करे। जर्मनी के टेलीविजन चैनल डॉयचे वेली के साथ साक्षात्कार में बर्लिन में लोबसांग ने कहा, एक देश, दो व्यवस्था का मॉडल हांगकांग तथा मकाऊ में पहले से ही है। बीजिंग ताइवान को भी अधिक स्वायत्तता देना चाहता है, जबकि तिब्बतियों को लेकर चीन का रुख बिल्कुल अलग है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, लोबसांग ने हदलाई लामा को दक्षिण अफ्रीका द्वारा वीजा दिए जाने से इंकार किए जाने पर निराशा जताई। तिब्बत में आत्मदाह की घटनाओं पर दलाई लामा के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह लोगों में गहरी निराशा को दर्शाता है।

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