Tuesday, November 1, 2011

फिलिस्तीन बना यूनेस्को सदस्य



फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एवं शैक्षिक एजेंसी (यूनेस्को) का पूर्ण सदस्य बन गया है। इस मामले पर यूनेस्को के मुख्यालय पेरिस में वोटिंग हुई। इस्रइल इस कोशिश के खिलाफ था जबकि अमेरिका ने भी यूनेस्को को दिए जाने वाले आर्थिक योगदान में कटौती करने की धमकी दी थी। फिलिस्तीन की इस सफलता को अलग राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्ण सदस्यता के लिए उसकी जारी लड़ाई में प्रतीकात्मक जीत माना जा रहा है। अमेरिका ने कहा है कि फिलिस्तीन प्राधिकरण को सदस्य बनाने के लिए यूनेस्को में हुआ मतदान समयपूर्व कदम है। इससे पश्चिम एशिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का वृहद, सही और स्थायी शांति स्थापना का साझा लक्ष्य कमजोर होगा।
फिलिस्तीन को यूनेस्को का पूर्ण सदस्य बनाने के लिए पेश प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ। 173 में से 107 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। 14 इसके विरोध में रहे जबकि 52 देशों ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया। यूनेस्को के पेरिस स्थित मुख्यालय में मतदान के समय मौजूद रहे फिलिस्तीन के विदेश मंत्री रियाद अल मलिकी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया जिससे फिलिस्तीन के कुछ अधिकारों को समर्थन मिलेगा। वहीं इस्रइल ने कहा कि इस कदम ने शांति के लिए आशा को क्षति पहुंचाई है। इस्रइल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘यह एकतरफा फिलिस्तीनी दांव है जिससे कोई जमीनी परिवर्तन नहीं होगा लेकिन इससे शांति समझौते की संभावना समाप्त हो जाएगी।फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव पर गंभीर आशंका जताई। अलग राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्ण सदस्यता के लिए जारी लड़ाई में प्रतीकात्मक जीत मिली फिलिस्तीन का रुख फिलिस्तीन की नजर संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता पर है। इसके लिए नवम्बर महीने में वोटिंग के जरिए फैसला होना है। संयुक्त राष्ट्र में फिलस्तीनियों को पर्यवेक्षक यानी ऑब्जर्वर का दर्जा हासिल है। इस्रइल-अमेरिकी रणनीति इस्रइल इन प्रयासों को अगर रोकना नहीं तो कम से कम धीमा करना चाहता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि यह समय से पहले शुरू की गई कोशिशें हैं जिसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। वीटो पॉवर संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता के लिए सुरक्षा परिषद में वोटिंग होनी है। अमेरिका ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करेगा। लेकिन यूनेस्को में किसी तरह के वीटो का प्रावधान नहीं है इसलिए वह फिलिस्तीनी कोशिश को नहीं रोक पाया। यूनेस्को पर गाज अमेरिका ने 1990 में एक कानून पारित किया था जिसके मुताबिक वह संयुक्त राष्ट्र की उस संस्था की आर्थिक सहायता में कटौती कर सकता है जिसमें फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता दी जाएगी। अमेरिकी कटौती का यूनेस्को के बजट पर काफी बुरा असर पड़ेगा। अमेरिका यूनेस्को को सात करोड़ डॉलर की सहायता देता है जो उसके कुल बजट का पांचवा हिस्सा है। पक्ष में आए देश : सभी अरब, अफ्रीकी, लातिन अमेरिकी तथा चीन-भारत जैसे एशियाई देश विरोध करने वाले देश : इस्रइल, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया और जर्मनी मतदान में नहीं हुए शामिल : जापान और ब्रिटेन 107 देशों का प्रस्ताव को समर्थन 14 देशों ने किया विरोध 52 देश रहे मतदान से अलग यूनेस्को के पेरिस स्थित मुख्यालय में भाषण देते फिलिस्तीन के विदेश मंत्री रियाद अल मलिकी।

No comments:

Post a Comment