मिस्र की राजधानी काहिरा के ऐतिहासिक तहरीर चौक पर चार दिन से असैन्य सरकार के खिलाफ जुटे हजारों लोगों का प्रदर्शन रंग लाया है। देश के सैन्य शासक राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया तेज करने पर सहमत हो गए हैं। तहरीर चौक पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की यह प्रमुख मांग थी। सेना की सुप्रीम काउंसिल के प्रमुख फील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर दिए अपने संबोधन में कहा है कि अगले साल जून अंत तक राष्ट्रपति चुनाव करा लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कैबिनेट का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। देश में संसदीय चुनाव अगले सप्ताह तय कार्यक्रम के मुताबिक ही होंगे। तहरीर चौक पर जुटे प्रदर्शनकार देश में सुधारों की गति को लेकर नाराज हैं। बीबीसी ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया है कि प्रदर्शनकारी सेना की ओर से रियायतों की घोषणा से संतुष्ट नजर नहीं आते। वे नारे लगा रहे हैं कि तहरीर चौक से नहीं जाएंगे। वे तंतावी के त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं। अपने संबोधन में तंतावी ने कहा कि सेना सिर्फ लोगों की सुरक्षा के लिए है और वो स्थायी सत्ता नहीं चाहती। सेना की सुप्रीम काउंसिल शासन करना नहीं चाहती। उसके लिए देशहित सवरेपरि है। पिछले कुछ दिनों से तहरीर चौक पर हुए हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए सुप्रीम काउंसिल की आपात बैठक हुई। इसमें सैनिक शासन के प्रतिनिधि और राजनीतिक गुटों के लोग शामिल हुए। इससे पहले शनिवार से जारी हिंसा के बाद सेना की ओर से नियुक्त अंतरिम सरकार ने प्रधानमंत्री एसाम शराफ की अगुआई में इस्तीफा दे दिया था। उधर, मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने ‘दूसरी क्रांति’ बताते हुए एक साथ प्रदर्शन का आह्वान किया था। हजारों लोगों ने सोमवार की रात तहरीर चौक पर ही गुजारी।लगातार चौथे दिन पुलिस ने हजारों प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस छोड़ी।
यमन में सालेह पद छोड़ने को तैयार लंदन (एजेंसी)। यमन से आ रही खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह सत्ता स्थानांतरण के लिए राजी हो गए हैं। यमन की राजधानी सना में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के दूत के अनुसार सालेह उपराष्ट्रपति को सत्ता सौंप सकते हैं। राष्ट्रपति के इस फैसले का प्रमुख विपक्षी दल ने स्वागत किया है। बहरीन में पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े लंदन (एजेंसियां)। बहरीन की पुलिस और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच झड़पें होने की खबर है। यह झड़पें उत्तर- पूर्वी शहर सितरा से शुरू हुई। पुलिस ने लगभग 3000 प्रदशर्नकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी है। ये झड़पें उस समय हुई हैं जब पुलिस ने माना था कि सैनिकों ने इस साल फरवरी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।
लोगों में गुस्सा क्यों
प्रदर्शनों की शुरु आत शनिवार से हुई जब सैन्य परिषद की ओर से नियुक्त अंतरिम सरकार ने संविधान में संशोधनों का प्रस्ताव रखा। इन संशोधनों के अनुसार सेना के बजट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। राष्ट्रपति चुनाव को वर्ष 2012 के अंत तक या 2013 के शुरू तक टाले जाने के प्रस्ताव से भी लोग नाराज हुए। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि नवम्बर में हो रहे संसदीय चुनाव के बाद ही राष्ट्रपति के चुनाव हों। पर्यवेक्षक के मुताबिक, लोगों को डर है कि सैन्य परिषद किसी तरह से सत्ता में बनी रहना चाहती है।
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