Monday, November 21, 2011

सिंगापुर को भारी निवेश का न्योता



भारत की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास योजना में सिंगापुर को महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे दक्षिण एशियाई देश में निवेश का न्योता दिया। भारत को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अगले पांच साल में 1000 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। दो दिवसीय यात्रा पर यहां आए डा. सिंह ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के साथ सुरक्षा तथा रक्षा क्षेत्र में सहयोग समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की और निवेश की पुरजोर वकालत की। सिंगापुर के प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित दोपहर भोज के दौरान डा. सिंह ने कहा, ‘हमारी सरकार सिंगापुर के साथ संबंधों को खासी अहमियत देती है। हमारा सहयोग बहुलवाद, धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतंत्र के साझा मूल्य तथा क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दृष्टिकोण की समानता पर निर्भर है।उन्होंने कहा, ‘सिंगापुर हमारी बुनियादी ढांचा विकास की महत्वाकांक्षी योजना के लिए एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरा है। आसियान देशों में यह भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश सहयोगी है।उन्होंने कहा, ‘हम सिंगापुर से बड़े पैमाने पर निवेश तथा प्रौद्योगिकी के प्रवाह का स्वागत करते हैं।
दोपहर भोज से पहले ली के साथ बातचीत के दौरान डा. सिंह ने निवेश के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने यह रेखांकित किया कि भारत को अपने बुनियादी ढांचा तथा अन्य क्षेत्रों के विकास के लिये बड़े पैमाने पर कोष की जरूरत है। सरकार ने अगले साल में केवल बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1000 अरब डालर के निवेश की जरूरत का अनुमान जताया है। सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त टीसीए राघवन ने कहा कि सिंगापुर का भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 14 अरब डालर है जो दूसरा सबसे बड़ा संचयी एफडीआई है।
सूत्रों ने कहा कि भारत, सिंगापुर से एफडीआई में उल्लेखनीय वृद्धि चाहता है। इसका कारण सिंगापुर में चीन का निवेश है जो आठ गुना अधिक है। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले साल 17 अरब अमेरिकी डालर का रहा। इसमें भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी 10 अरब डालर रही। मनमोहन सिंह की यात्रा की पूर्व संध्या पर भारत और सिंगापुर ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सिंगापुर में शहरी विकास के क्षेत्र में भारतीय नौकरशाहों को प्रशिक्षण देने को लेकर दो सहमति पत्र पर दस्तखत किए। डा. सिंह ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि 1990 के दशक में सिंगापुर के साथ संबंधों में नया आयाम जुड़ा जब भारत की विदेश और आर्थिक नीतियों में रणनीतिक बदलाव आए और आज यह पूर्व की ओर देखो नीतिमें बदल गया है। ली की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि सिंगापुर के प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के पैरोकार रहे हैं। सिंह ने कहा कि ली की 2005 में भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर दस्तखत किए। उन्होंने कहा, ‘इस समझौते से हमारे व्यापार और निवेश संबंधों में नई ऊंचाई आई।डा. सिंह ने कहा कि आज हम जिस अनिश्चितता वाली दुनिया में रह रहे हैं, वहां सिंगापुर में आए त्वरित बदलाव और आर्थिक वृद्धि माडल एक उम्मीद की किरण है। आपने न केवल एशिया के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण दिया है।ली को अगले साल भारत आने का निमंतण्रदेते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, ‘इससे आपको भारत में पिछले कई साल से हो रहे विकास और उसमें सिंगापुर के योगदान को देखने का मौका मिलेगा।उन्होंने कहा कि भारत-सिंगापुर का संबंधों का दायरा राजनीति, सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग के क्षेत्र में बढ़ा है। हम इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को महत्व देते हैं।

No comments:

Post a Comment