तालिबान के 14 पूर्व नेताओं के नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित लोगों की सूची से हटा दिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति ने यह कदम अफगानिस्तान सरकार के अनुरोध पर उठाया है। परिषद ने कहा कि इन नामों को सूची से हटाया जाना अफगानिस्तान सरकार द्वारा किए जा रहे सुलह के प्रयासों के प्रति ठोस समर्थन का संकेत होगा। इन 14 तालिबानियों में से चार पिछले साल तालिबान के साथ वार्ता के लिए गठित उच्च शांति परिषद में भी शामिल थे। हालांकि यह भी पता चला है कि अफगानिस्तान ने सूची से हटाने के लिए कुछ और नाम भेजे थे, जिन्हें सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी नहीं मिली। परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति, स्थायित्व और सुलह कायम करने के लिए उच्च शांति परिषद के प्रयासों को स्वीकार करती है। इन प्रयासों में शामिल होने के लिए सभी अफगानियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पर प्रतिबंध 1999 में लगाए गए थे। उन दिनों तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और उत्तर अटलंाटिक संधि संगठन (नाटो) इस बात से बखूबी वाकिफ हैं कि युद्ध समाप्त हुए बगैर और अफगान सरकार और तालिबान के बीच राजनीतिक समझौते के बिना अफगानिस्तान से 2014 तक सफलतापूर्वक फौजें हटाना संभव नहीं होगा। अफगानिस्तान सरकार पिछले कुछ समय से तालिबान को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने के प्रयासों में लगी है। अमेरिका ने भी कहा है कि वह तालिबान से शांति वार्ता कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने इन प्रयासों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए पिछले दिनों तालिबान और अलकायदा को अलग-अलग सूची में रखते हुए उन पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी। पहले संयुक्त राष्ट्र दोनों को एक ही तरह के चरमपंथी गुटों की तरह से देखता था सरकार ने भेजे थे 20 नाम : अफगान अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने 20 नेताओं का नाम सूची से हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य तालिबान नेताओं के नाम हटाने को लेकर सचेत रहना चाहते हैं। इनमें रूस भी एक है। सुरक्षा परिषद के इस महीने के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के राजदूत पीटर विटिंग ने कहा, इस निर्णय के जरिए एक बड़ा संदेश दिया गया है कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान सरकार की इस पहल का समर्थन करता है कि तालिबान के साथ राजनीतिक वार्ता की जाए जिससे शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ाुक्रवार को 14 नाम हटाए जाने के फैसले से पहले सुरक्षा परिषद की काली सूची में 137 नाम थे। इस सूची में नाम होने का अर्थ होता है यात्राओं पर प्रतिबंध और संपत्ति जब्त करने का आदेश। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में वर्ष 2001 से पहले तालिबान का शासन था। न्यूयॉर्क में 9/11 के हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर इस आधार पर हमला कर दिया था कि तालिबान सरकार ने ओसामा बिन लादेन को पनाह दे रखी है। दस साल लंबे युद्ध के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई तालिबान को फिर से राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना चाहते हैं, लेकिन अब तक तालिबान इस प्रस्ताव के जवाब में कहते रहे हैं कि पहले सभी विदेशी फौजों को देश छोड़कर जाना होगा।
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