अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के भाई अहमद वली करजई की हत्या करने वाला उनका अंगरक्षक तालिबान में भर्ती होने से पहले अमेरिका की विशेष सेना और सीआइए के साथ काम कर चुका था। द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, मंगलवार को कंधार स्थित वली के घर में गोली मारकर उनकी हत्या करने वाला सरदार मुहम्मद अक्सर ब्रिटिश अधिकारियों के साथ बैठक करता था। सीआइए संचालित अर्द्धसैनिक बल, कंधार स्ट्राइक फोर्स में उसके दो जीजा कार्यरत रहे हैं। हालांकि अब तक के सबूतों से पता चला है कि सरदार मुहम्मद, अहमद वली के विश्वसनीय लोगों में से था। करजई के दूसरे भाई महमूद करजई ने कहा कि हमारी जांच बताती है कि पिछले तीन महीनों से वह सामान्य व्यवहार नहीं कर रहा था। वह काफी चिंतित और परेशान रहता था। आधी रात को उसके फोन आते थे। हमें पता चला है कि उसने पाकिस्तान स्थित क्वेटा जाकर कुछ तालिबान से मुलाकात की थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सच है तो इससे नाटो से नियंत्रण अपने हाथों में ले रही अफगान सेना और पुलिस के लिए भविष्य में समस्याएं दिखती हैं। साथ ही तालिबानी सक्रियता भी नजर आती है। विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान के पास कुशल खुफिया अधिकारी हैं, जो अफगान सेना में घुसपैठ करते हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के सरकारी अधिकारियों पर तालिबान द्वारा बड़े हमले होते रहें हैं और कई तालिबान गुप्तचर सेना में घुस गए हैं।
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