अमेरिका द्वारा सैन्य सहायता रोके जाने के एक दिन बाद पाकिस्तान ने कहा है कि इससे उसके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वह अमेरिकी सहायता के बिना भी अपने अभियान जारी रख सकता है। साथ ही उसने यह भी कहा कि सैन्य सहायता और उपकरणों के लिए दी जानेवाली 80 करोड़ डॉलर (करीब 36 अरब रुपये) की सहायता राशि रोके जाने की उसे कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा, सेना ने बिना किसी बाहरी मदद के अपने संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए अतीत और वर्तमान में कई अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित किया है। आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अमेरिका ने रविवार को पाकिस्तान सेना को प्रति वर्ष दी जानेवाली दो अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा रोकने का निर्णय किया। ह्वाइट हाउस चीफ ऑफ स्टॉफ टाम डोनिलॉन ने इस खबर की पुष्टि की। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी के हाल ही में दिए गए बयान को दोहराते हुए कहा कि सैन्य सहायता के लिए मिलने वाली अमेरिकी मदद का इस्तेमाल नागरिकों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सहायता रद होने के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, हमें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली हैं। सहायता राशि के तहत 30 करोड़ डॉलर (करीब 13 अरब रुपये) आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान को अफगानिस्तान सीमा पर एक लाख से ज्यादा की सैनिकों की तैनाती पर आने वाले व्यय केभुगतान के संबंध में दिया जाता है। दूसरी ओर सैनिकों के प्रशिक्षण और उपकरणों की खरीद के लिए करोड़ों डॉलर की सहायता भी इसका मुख्य भाग है। अमेरिका आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़े संगठन हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है। हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तानी सरजमीं का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अमेरिकी और नाटो सैनिकों को निशाना बनाने के लिए करता है। अमेरिकी मीडिया का दावा है कि पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी के तार हक्कानी नेटवर्क से जुडे़ हैं। पाक को अमेरिकी सैन्य मदद में कटौती सही : भारत नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो : पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य मदद पर लगातार चिंता जताते रहे भारत ने इसमें 80 करोड़ डॉलर (करीब 36 अरब रुपये) की सहायता रोकने के फैसले का स्वागत किया है। विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को प्रभावित कर रही इस सैनिक इमदाद में कमी को सही फैसला करार दिया है। कृष्णा के अनुसार, भारत हमेशा मानता है कि इस इलाके में अमेरिका का भारी सशस्त्रीकरण शक्ति संतुलन की इबारत को गड़बड़ा सकता है। खासकर भारत-पाक संबंधों की नजाकत देखते हुए हम सीमित संदर्भो में इसका स्वागत करते हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के साथ भारत हर महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मंच पर यह बात उठाता रहा है कि पाक इस सैनिक सहायता का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर रहा है। हालांकि विदेश मंत्री कृष्णा ने पाकिस्तान के साथ विश्वास बहाली की कोशिशों में सकारात्मक प्रगति की भी उम्मीद जताई। उनका कहना था कि इस महीने के अंत में पाकिस्तानी विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार के नई दिल्ली दौरे में वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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