: लीबिया में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के नेतृत्व में जारी सैन्य कार्रवाई में शामिल देशों के प्रतिनिधियों की इस्तांबुल में शुक्रवार को बैठक हुई। नाटो नेताओं को उम्मीद है कि विद्रोही लीबियाई शासक मुअम्मर गद्दाफी को गद्दी से हटाने के करीब पहुंच चुके हैं। अल जजीरा के अनुसार, तथाकथित लीबिया संपर्क समूह की इस बैठक की अध्यक्षता तुर्की के प्रधानमंत्री, रिसेप तईप एरडोगन कर रहे हैं। बैठक में संकट के समाधान के लिए तुर्की समर्थित राजनीतिक खाके का आकलन किया जाएगा और बेनगाजी स्थित राष्ट्रीय अस्थायी परिषद की मदद से आगे के कदमों पर चर्चा होगी। मार्च के बाद अपने तरह की यह चौथी बैठक है। बीबीसी डॉट को डॉट यूके के अनुसार, इस्तांबुल में जुटे 15 नाटो नेताओं में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग, इटली के फ्रैंको फ्रैटिनी, और फ्रांस के एलेन जुपे और नाटो महासचिव एंडर्स फोघ रासमुसेन शामिल हैं। इंस्ताबुल स्थित अलजजीरा संवाददाता बामाबी फिलिप्स ने कहा, बैठक का मुख्य फोकस गद्दाफी से यथासम्भव जल्द से जल्द छुटकारा पाने और उसके बाद की स्थिति पर विचार करने पर होगा। ब्रिटिश विदेश विभाग की वेबसाइट पर जारी एक बयान में विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है, सैन्य कार्रवाई लगातार तेज होगी और विपक्ष की ताकत लगातार बढ़ेगी। यहां संपर्क समूह की बैठक में अबतक सर्वाधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, यहां तक कि अफ्रीका और मध्य पूर्व के प्रतिनिधि भी हैं। संपर्क समूह 40 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एकजुट करेगा। फ्रांस के नेता जुपे इस सप्ताह से कर्नल मुअम्मर गद्दाफी सरकार के साथ संपर्को पर आधारित एक राजनीतिक समाधान की संभावनाओं का राग अलाप रहे हैं। फ्रांस ने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत नागरिकों की हिफाजत के लिए नाटो के नेतृत्व में हमले शुरू कराने में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। क्लिंटन के साथ आए वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है, नाटो देश, गद्दाफी के बाद की परिस्थिति पर चिंतन शुरू कर रहे हैं। गद्दाफी का समय समाप्त होने वाला है और यह बैठक परिस्थिति के आकलन करने व बदलाव की तैयारी करने हेतु महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। बैठक में बेनगाजी स्थित राष्ट्रीय अस्थायी परिषद के प्रतिनिधि भी उपस्थित होंगे, लेकिन चीन और रूस को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया है।
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