Saturday, July 9, 2011
स्थिरता की आस में थाईलैंड
राजनीतिक अस्थिरता के लिए खासे बदनाम हो चुके थाईलैंड में शासन की बागडोर अब एक महिला नेत्री के हाथ में आ गई है, जो राजनीति में पूर्ण रूप से अनुभवहीन हैं। इंगलक शिनवात्रा देश की नई प्रधानमंत्री चुनी गई हैं और उनके सामने कई कठिन चुनौतियां खड़ी हैं। हालांकि इंगलक कोई आम महिला नहीं हैं, वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा की छोटी बहन हैं। इंगलक को देश चलाने के लिए बड़े भाई से लगातार सहयोग भी मिलेगा, क्योंकि इस जीत में उनकी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इंगलक शिनवात्रा ने सत्तासीन दल डेमोक्रेटिक पार्टी को हराया है। इस आम चुनाव में इंगलक की फू थाई पार्टी ने 500 सीटों वाली थाई संसद में 265 सीटें जीत ली हैं, जबकि निवर्तमान प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा की पार्टी को महज 159 सीटें ही मिली हैं। इंगलक को चार और पार्टियों का समर्थन हासिल है, जिससे उनके पक्ष में बहुमत 299 का हो गया। परिणाम आने के बाद ब्रिटिश मूल के अभिसित वेज्जाजीवा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और उन्होंने इंगलक शिनवात्रा को महिला प्रधानमंत्री के रूप में सरकार के गठन व चलाने में मदद करने का आश्वासन दिया है। इन परिणामों से माना जा रहा है कि थाईवासियों ने अपने देश की राजनीति में सेना के हस्तक्षेप को नकार दिया है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण वहां भी सेना ने सत्ता में पकड़ बनाते हुए हस्तक्षेप शुरू कर दिया था और इसे लेकर आमजन में काफी नाराजगी थी। दूसरी ओर इंगलक की जीत में माना जा रहा है कि उनके बड़े भाई पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन की नीतियों का बड़ा योगदान है और इसी को आधार बनाते हुए वह चुनाव मैदान में उतरीं, जिसमें उन्हें आशातीत सफलता भी मिली। राजनीति में बिना किसी अनुभव के प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने वाली इंगलक शिनवात्रा को अपने भाई से काफी मदद मिलने की संभावना है। कहा जा रहा है कि दुबई में स्व-निर्वसन जीवन जीने वाले थाकसिन के हाथों में सत्ता की मुख्य चाभी रहेगी यानी वह अपनी बहन की सरकार में अप्रत्यक्ष रूप से सलाहकार की भूमिका निभाते रहेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश ने इस चुनाव को लेकर काफी हिंसा देखी है। रेड शर्ट (लाल कमीजधारी) कहलाने वाले ये प्रर्दशनकारी पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा के समर्थक हैं, जो फिर से चुनाव कराने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि वर्तमान अभिसित वेज्जाजीवा सरकार अवैध है। वह चुनकर सत्ता में नहीं आई है, इसलिए संसद को भंग किया जाए और नए सिरे से चुनाव कराकर सरकार का गठन किया जाए। पूरे विवाद की शुरुआत 2006 से होती है, जब थाकसिन की सरकार को सितंबर में सैन्य विद्रोह के बाद अपदस्थ कर दिया गया था। सैन्य विद्रोह के बाद दिसंबर 2007 में पहली बार चुनाव हुए, जिसमें शिनवात्रा के समर्थकों की जीत हुई, लेकिन येलो शर्ट (पीपुल्स एलायंस फार डेमोक्रेसी) समर्थकों ने एक साल बाद विरोध शुरू कर दिया, जिसमें दिसंबर 2008 में शिनवात्रा के समर्थकों की सरकार गिर गई और अभिजीत ने सरकार बनाई। विरोध की चिंगारी आगे भी जलती रही और दो साल बाद इसने प्रचंड रूप धारण कर लिया और मार्च 2010 से रेड शर्ट समर्थकों ने अभिजीत की सरकार गिराने के वास्ते बैंकाक में हर जगह विरोध आंदोलन शुरू कर दिया। 12 मार्च से लेकर 19 मई 2010 तक इन प्रदर्शनकारियों ने बैंकाक में खूब तबाही मचाई। जबरदस्त विरोध प्रदर्शन के कारण बैंकाक के हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने स्टॉक एक्सचेंज समेत कई इमारतों में आग लगा दी। विरोध को देखते हुए सेना को सड़क पर उतरना पड़ा और काफी जद्दोजहद के बाद बैंकाक में शांति की स्थापना हो सकी। इस विरोध के दौरान जान-माल की भारी क्षति हुई। हिंसक क्षड़पों में 91 लोग मारे गए, जिसमें एक जापानी और एक इतालवी पत्रकार भी शामिल थे। इस दौरान पांच बिलियन डॉलर यानी 150 बिलियन बहत (थाई मुद्रा) बरबाद हो गए। वर्ष 2006 से देश में छाई राजनीतिक अस्थिरता का अंत इस साल तीन जुलाई को समाप्त होता हुआ दिखा, जब देश में आम चुनाव हुए। इंगलक शिनवात्रा इस चुनाव में जीतकर उभरीं। इंगलक अपने बड़े भाई की तरह उद्योग जगत में सफल होने के बाद राजनीति के मैदान में उतरी हैं। फू थाई पार्टी की शीर्ष उम्मीदवार रहीं इंगलक ने प्रधानमंत्री पद से पूर्व और कोई पद नहीं संभाला है। इंगलक के बारे में कहा जाता है कि वह बहुत व्यवहार कुशल हैं ओर लोगों को एक साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं। जहां तक उनकी शैक्षणिक योग्यता का सवाल है तो उन्होंने अपने परिवार के राजनीतिक गढ़ यानी देश के उत्तरी शहर चियांग माइ से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अमेरिका के केंटुकी स्टेट यूनिवर्सिटी से परास्नातक की डिग्री हासिल की। 44 साल की इंगलक अपने परिवार की नौंवी संतान हैं। पढ़ाई के बाद उन्होंने अपने भाई थाकसिन द्वारा स्थापित दूरसंचार कंपनी एआइएस में प्रबंध निदेशक के पद पर कार्य करने के बाद अपने ही परिवार की एक अन्य प्रॉपर्टी से संबंधित कंपनी में भी काम किया। भले ही राजनीति के क्षेत्र में उनका अनुभव शून्य हो, लेकिन पेशेवर जगत में उन्हें खासा अनुभव हासिल है। इस चुनावी जीत को थाकसिन के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। भ्रष्टाचार के आरोप में खुद ही देश छोड़कर दुबई में रहने वाले थाकसिन के स्वदेश लौटने के कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि उन्होंने तुरंत स्वदेश लौटने की बात को खारिज कर दिया है। उद्योग में सफलता के झंडे गाड़ने के बाद थाकसिन शिनवात्रा ने 1994 में राजनीति में हाथ आजमाया और 1998 में थाई रक थाई (टीआरटी) पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी ने 2001 में जीत हासिल की और थाकसिन ने प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया। वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री भी बने। हालांकि बाद में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे। सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थिति न होने और भ्रष्टाचार के आरोप में थाकसिन को दो साल की कैद की सजा सुना दी साथ ही पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया। बाद में उनके समर्थकों ने फू थाई पार्टी का गठन किया, जिसे थाकसिन का भी समर्थन हासिल है। पिछले कई सालों से राजनीतिक उठापटक देखने के बाद थाईलैंड में शांति के आसार बन रहे हैं। पूर्ण बहुमत पाने के बावजूद इंगलक अपने सहयोगियों के साथ सरकार बनाने का मन बना रही हैं। लगातार विद्रोहों के कारण थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान उठाना पड़ा है और लोकतंत्र के भविष्य पर भी संकट आ गया था। ऐसे में युवा व महिला प्रधानमंत्री के रूप में इंगलक का पहला लक्ष्य होगा कि देश में राजनीतिक स्थिरता लाई जाए। साथ ही विरोधियों व आलोचकों को फिर से खतरनाक विद्रोह व साजिश रचने का मौका न मिले। पिछले साल बैंकाक ने विरोध-आंदोलन का जो हश्र देखा है उसे थाईवासी अपनी धरती पर दोबारा होते नहीं देखना चाहेंगे|
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