Tuesday, July 12, 2011
पाक में पहचान को मोहताज शादीशुदा हिंदू
पाकिस्तान में शादी के पंजीकरण के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने सरकार का ध्यान खींचने की कोशिशें तेज कर दी हैं। एक हिंदू युगल ने यहां प्रेस क्लब के सामने सोमवार को सादगी से विवाह रचाया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, सिंध प्रांत के दूसरे सबसे बड़े शहर हैदराबाद में प्रेस क्लब के सामने मुकेश और पद्मा ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इस शादी को आम हिंदू शादियों की तरह तड़क-भड़क से दूर रखा गया था ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की शादी के पंजीकरण के लिए कानून की मांग को उठाया जा सकें। शादी संपन्न कराने वाले गुरु सुख देव ने कहा, 1947 से हिंदू युगल को कानूनी तौर पर पति-पत्नी की तरह स्वीकार नहीं किया जाता। इससे कई घरेलू, सामाजिक और मानसिक समस्याएं हिंदू परिवारों के लिए खड़ी हो जाती हैं। खास तौर पर महिलाओं के लिए। यात्रा के दौरान शादी का कोई सुबूत न होने के कारण अक्सर पुलिस परेशान करती है। हिंदुओं की शादी का पंजीकरण न होना गंभीर समस्या है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अल्पसंख्यक हिंदुओं को कंप्यूटरीकृत पहचान पत्र जारी करने का आदेश दिया है, इसके बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सुखदेव ने कहा कि पाकिस्तान बनने के बाद से हिंदू विवाह के लिए कोई कानून नहीं बना। उन्होंने कहा, उनके समुदाय की कई लड़कियों का अपहरण करके जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। हिंदू लड़कियों के संरक्षण के लिए कोई कानून नहीं है। इस शादी में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से कानून के प्रभावी होने तक हिंदू विवाह पंजीकरण के लिए अध्यादेश जारी करने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों में शामिल सपना देवी ने कहा, मेरी शादी को 17 साल हो गए, लेकिन इसका कोई कानूनी सुबूत नहीं है। भगवान न करे, लेकिन अगर मेरे पति को कुछ हो जाता है तो मैं प्रापर्टी के लिए दावा भी पेश नहीं कर सकती।
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