अफगानिस्तान को निशाना बना कर चली गई पाकिस्तान की हर चाल उल्टी पड़ने लगी है। उसने अगर सोचा होगा कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और बेहद लोकप्रिय नेता बुहरानुद्दीन रब्बानी की हत्या करवा कर वह अफगानिस्तान में दहशत भर देगा और उसे तालिबान आतंकियों को सत्ता में हिस्सेदारी देने के लिए मजबूर कर देगा तो वह साजिश उसे दगा दे गई लगती है। अफगानिस्तान ने इस हत्या का सीधा दोष पाकिस्तान पर मढ़ते हुए कहा है कि यह साजिश उसके क्वेटा शहर में रची गई। इसके साथ ही अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई ने घोषणा कर दी है कि उनकी सरकार अब तालिबानियों से कोई बात नहीं करेगी। करजई की दूसरी घोषणा तो पाकिस्तान का सीना ही चाक कर देगी जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान अपने भविष्य के पुनर्निर्माण में भारत, अमेरिका और ‘नाटो’ देशों को ही साझीदार बनाएगा। करजई की यह घोषणा पाकिस्तान के उन इरादों पर पानी फेरने वाली है जिसमें वह चीन की मदद से अमेरिका को अफगानिस्तान से बेदखल की साजिश रच रहा था और हक्कानी जैसे आतंकियों को वहां की सत्ता का दावेदार बना रहा था। अब हालात हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिका से खुली दुश्मनी मोल ले ली है जिसका खामियाजा उसे आज नहीं तो कल चुकाना ही है। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने फिर चेताया है कि पड़ोस को काटने के लिए पाकिस्तान ने जो आतंकी ‘भेड़िये’ पाल रखे हैं उन्हें वश में रखे। जाहिर है कि अमेरिका हक्कानी सहित तमाम आतंकी गुटों के सफाए से कम पर मानने वाला नहीं। आश्चर्य है कि पाकिस्तान अभी भी हालात की गंभीरता को समझने के लिए तैयार नहीं है। अभी पिछले दिनों वहां सरकार और राजनीतिक पार्टियों की सेना के साथ घंटों बैठक चली लेकिन इसमें भी अमेरिका को बंदरघुड़कियां देने और ‘अपने लोगों’ यानी आतंकियों से दोस्ती बनाए रखने के फैसले ही लिए गए। पाकिस्तान का यह चेहरा देख लेने के बाद अफगानिस्तान ने तय कर लिया है कि वह अपना पहला सामरिक साझीदार भारत को बनाएगा और इसके लिए करजई यहां आकर एक ऐतिहासिक संधि की घोषणा करने वाले हैं। आतंकियों ने इस खूबसूरत देश को तहस-नहस कर दिया है और इसे तमाम क्षेत्रों में पुनर्निर्माण की जरूरत है। पाकिस्तान की शह पर आतंकियों के निशाने पर होने के बावजूद भारत वहां सड़क, अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में लगा हुआ है। भारत की दिलेरी और दरियादिली ने अफगानियों का दिल जीत रखा है। उसकी आज की पहली जरूरत है देश में कानून का राज्य स्थापित करना। अफगानिस्तान को न केवल सेना बल्कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी चुस्त दुरूस्त करना है। इसमें सबसे बड़ी सहायता उसे भारत से ही मिल रही है जिसके प्रशिक्षण स्कूलों में इन दिनों अफगानी ट्रेनी बढ़ते ही जा रहे हैं। भारत की मदद से अफगानिस्तान भविष्य की चुनौतियों से निबटने की तैयारी में जुटा हुआ है।
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