Tuesday, October 11, 2011

नीमू परियोजना पर पाकिस्तान ने जताया विरोध


किशनगंगा परियोजना में अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आइसीजे)के अंतरिम आदेश से खुश पाकिस्तान अब भारत द्वारा सिंधु नदी पर बनाई जा रही नीमू-बाजगो पनबिजली परियोजना के मामले को आइसीजे में ले जाने का तैयारी में है। मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान इस परियोजना पर आपत्ति जताना चाहता है और उसका कहना है कि यह परियोजना कथित रूप से सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करती है। पाक अधिकारियों ने लेकिन इसी नदी पर चूटक पनबिजली परियोजना पर अपनी आपत्तियां वापस ले ली हैं। उनका दावा है कि भारत ने इस्लामाबाद के आग्रह के अनुरूप कदम उठाए हैं जिससे यह सुनिश्चित हो कि पानी का बहाव न रुके। पाकिस्तान के सिंधु जल आयोग के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि पाक अधिकारियों के परियोजना स्थल के अपने पहले दौरे के बाद नीमू-बाजगो परियोजना को लेकर आइसीजे की शरण में जाने का फैसला किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना कथित रूप से सिंधु जल समझौता 1960 का पूरी तरह से उल्लंघन है। हालांकि इस मामले में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और जल एवं बिजली मंत्रालय के प्रवक्ता टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। नीमू-बाजगो और चूटक परियोजनाओं के स्थल का दौरा करने वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने आगे की कार्रवाई के लिए अपनी एक रिपोर्ट जल एवं बिजली मंत्रालय को सौंपी है। एक अधिकारी ने दावा किया कि भारत जुलाई 2012 तक नीमू बाजगो परियोजना को पूरा करेगा और इससे सिंधु नदी का जल बहाव कम हो जाएगा। इस परियोजना के द्वार वाले जल मार्ग की डिजाइन और बांध की गहराई कथित रूप से सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करती है। पाकिस्तान ने इस परियोजना के डिजाइन को लेकर 5 आपत्तियां जताई हैं। मालूम हो कि नीमू-बाजगो परियोजना को जम्मू कश्मीर के लेह क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। कई दौर की चर्चा के बाद भारत और पाकिस्तान इस परियोजना को लेकर अपने मतभेद नहीं सुलझा पाए हैं। चूटक परियोजना जम्मू कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में सिंधु नदी की सहायक नदी सूरू पर विकसित की जा रही है।

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