Monday, October 17, 2011

चीन का बढ़ता दखल



पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत के लिए गंभीर चिंता का सबब है। सेना प्रमुख वीके सिंह ने पीओके में चार हजार चीनी सैनिकों की उपस्थिति बताई है। इसके पहले भी जम्मू-कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में ग्यारह हजार से अधिक चीनी सैनिकों की हलचल जारी थी, जिसे चीन ने यह कहकर नकारने की कोशिश की थी कि यह अमला किसी गलत काम में संलग्न नहीं है। किंतु चीन ने यह साफ नहीं किया कि आखिर इतनी बड़ी सशस्त्र फौज की पहलकदमी किस लिए है? भारतीय सीमा पर चीन और पाकिस्तानी सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास इस बात का प्रतीक है कि चीन भारत को घेरने के लिए लगातार कदम बढ़ा रहा है। चीन जल्दी ही पाकिस्तान के पहले संचार उपग्रह का प्रक्षेपण भी करने जा रहा है जिससे दोनों के द्विपक्षीय संबंध और प्रगाढ़ होगें। इस उपग्रह के प्रक्षेपण का उद्देश्य तो यह बताया गया है कि यह मौसम पर निगरानी और उच्च क्षमता वाली संचार सुविधा पाकिस्तान को मुहैया कराएगा, लेकिन असल मकसद इसके जरिये भारत की सामरिक और रक्षा गतिविधियों पर निगाह रखने की है। कुछ समय पहले चीनी सैनिकों ने वास्तविक नियंतण्ररेखा को लांघ कर भारत की परिधि में न केवल घुसने का दुस्साहस दिखाया बल्कि लद्दाख क्षेत्र में ठेकेदार को डराकर निर्माणाधीन यात्री प्रतीक्षालय का काम भी रूकवा दिया था। इसका शर्मनाक नतीजा यह रहा कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर भारतीय सेना ने दखल देकर राज्य सरकार को यथास्थिति बनाए रखने के लिए मजबूर कर दिया। कोई जवाबी कार्रवाई करने की बजाय लाचारी दिखाने से चीनी सैनिकों की हौसला अफजाई ही हुई। चीन की इस तरह की हरकतें नई नहीं हैं। 2009 में चीनी सेना ने लेह लद्दाख के शिखरों पर चिन्हित अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन कर पत्थरों और चट्टानों पर लाल रंग पोत दिया था। 31 जुलाई 2009 को तो चीनी सैनिक मर्यादा की सभी हदें पार कर भारत के गया शिखर क्षेत्र में डेढ़ किलोमीटर भीतर घुसकर कई चट्टानों पर लाल रंग से चाइनाऔर चीन-9’ लिख देने की हिमाकत दिखा चुके हैं। जबकि एक समझौते के तहत शिखर गया को दोनों देश अंतरराष्ट्रीय सीमा की मान्यता देते हैं। यह जम्मू-कश्मीर के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश के स्पीति और तिब्बत के केंद्र में स्थित है। इससे पहले चीनी सेना के हेलिकॉप्टरों ने जून 2009 में चूमार क्षेत्र में वास्तविक नियंतण्ररेखा को लांघ कर दूषित खाद्य सामग्री भारतीय सीमा में गिरा कर भारत को मुंह चिढ़ाया था। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित काराकोरम क्षेत्र में भी चीनी हलचलें बढ़ती जा रही हैं। चीन ने सीधे इस्लामाबाद पहुंचने के लिए काराकोरम होकर सड़क मार्ग भी तैयार कर लिया है। इस निर्माण के बाद चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानने के बयान भी देने शुरू कर दिए हैं। चीनी दस्तावेजों में अब इस विवादित क्षेत्र को उत्तरी पाकिस्तान दर्शाया जाने लगा है। भारत विरोधी मंशा के चलते ही चीन ने पीओके क्षेत्र में 80 अरब डॉलर का निवेश किया है। यहां से वह अरब सागर पहुंचने की तजवीज जुटाने में लगा है। चीन की पीओके में ये गतिविधियां सामरिक दृष्टि से बेहद चिंतनीय हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी चीनी हस्तक्षेप लगातार मुखर हो रहा है। हाल ही में गूगल अर्थ से होड़ बरतते हुए चीन ने एक ऑन लाइन मानचित्र सेवाशुरू की है जिसमें उसने भारतीय भू-भाग अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चीन को अपने देश का हिस्सा बताया है। मानचित्र खंड में इसे चीनी भाषा में प्रदर्शित करते हुए अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताया गया है जिस पर चीन का दावा पहले से ही बना हुआ है। इस सिलसिले में भारतीय अधिकारियों ने सफाई देते हुए स्पष्ट किया है कि दक्षिणी तिब्बत का तो इसमें विशेष उल्लेख नहीं है, लेकिन इसकी सीमाओं का विस्तार अरुणाचल तक दर्शाया गया है। इसके अलावा अक्साई चीन को जरूर शिनजियांग प्रांत का अंग बताया गया है। जबकि हकीकत में यह जम्मू- कश्मीर में लद्दाख का हिस्सा है। इसमें दो राय नहीं कि आजाद भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने कभी भी चीन की छिपी साम्राज्यवादी मंशा को वास्तविक तौर पर नहीं समझा। हालांकि प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक महाषर्ि अरबिंद ने परतंत्र भारत में ही चीन के मंसूबों को भांपते हुए कहा था, ‘चीन दक्षिण-पश्चिम एशिया और तिब्बत पर पूरी तरह छाकर उसे निगलने का संकट उत्पन्न कर सकता है। साथ ही भारतीय सीमाओं तक के सारे क्षेत्र पर कब्जा जमा लेने की सीमा पार कर सकता है।महषर्ि का यह पूर्वाभास चीनी मंसूबों के बारे आज खरा साबित हो रहा है। चीन ने ताइवान में पहले तो आर्थिक मदद और विकास के बहाने घुसपैठ की और फिर ताइवान का अधिपति बनने का प्रयास करने लगा। तिब्बत पर तो चीन के अनाधिकृत कब्जे से दुनिया वाकिफ है। साम्यवादी देशों की हड़प नीतियों के चलते ही चेकोस्लोवाकिया बरबादी के चरम पर पहुंचा। पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार के बंदरगाहों पर चीनी युद्धपोत लहरा रहे हैं। वि मंचों से चीन दुनिया के देशों को संदेश भी देने में लगा है कि भारत के पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार समेत किसी भी सीमांत देश से मधुर संबंध नहीं हैं। यही नहीं चीन नकली भारतीय मुद्रा छापकर लगातार पाकिस्तान व बांग्लादेश के जरिये भारत पहुंचा कर भारतीय अर्थव्यवस्था को बिगाड़ रहा है। चीन द्वारा नकली दवाएं बनाकर उन पर मेड इन इंडियालिखकर तीसरी दुनिया के देशों में खपाने का सिलसिला सार्वजनिक होने के बावजूद जारी है। इन अप्रत्यक्ष व अदृश्य चीनी सामरिक रणनीतियों से आंख मूंदकर भारत अब तक सचाई से मुंह चुराता रहा है। अब भारत द्वारा चीन को जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब देने के कुछ प्रयास होते जरूर दिख रहे हैं लेकिन चीनी कुटिलता के समक्ष इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।

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