Monday, October 3, 2011

तेलंगाना पर और वक्त की दरकार

नई दिल्ली अलग तेलंगाना राज्य की मांग पर आंध्रप्रदेश के कांग्रेसी नेताओं में गहरे मतभेद ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ ही केंद्र सरकार को भी उलझन में डाल दिया है। यही कारण है कि पार्टी और सरकार दोनों ही इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए और अधिक विचार-विमर्श की जरूरत बता रहे हैं। जबकि माकपा ने विचार विमर्श में समय बर्बाद नहीं करने के बजाय तत्काल फैसला लेने की मांग की। वहीं सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेता चंद्रशेखर राव दिल्ली पहुंच गए हैं। आंध्रप्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद के शुक्रवार को तेलंगाना पर रिपोर्ट देने के बाद पार्टी और सरकार में सरगर्मी बढ़ गई थी। शुक्रवार को कांग्रेस कोर कमेटी में भी इस पर विचार किया गया। वहीं शनिवार को नार्थ ब्लाक में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, गुलाम नबी आजाद और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया लेकिन सारी कवायद बेनतीजा रही। बैठक के बाद प्रणव मुखर्जी ने कहा कि आमराय कायम करने के लिए और अधिक विचार विमर्श की जरूरत है। मुखर्जी ने कहा कि सरकार स्थिति और आंदोलन की गंभीरता से अवगत है। आजाद ने भी माना कि तेलंगाना पर फैसला लेना पार्टी और केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं है। आंध्र प्रदेश में पार्टी प्रभारी आजाद का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण रखता है क्योंकि वे तेलंगाना समर्थकों और विरोधियों से सीधे रूबरू हुए हैं। आंदोलन के कारण राज्य के तेलंगाना क्षेत्र के दस जिलों में जनजीवन ठप है। केंद्रीय मंत्रियों की यह बैठक उस वक्त हुई है जब टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव तेलंगाना के मुद्दे पर जल्द फैसले की मांग को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज व अन्य नेताओं से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार पर तेलंगाना मामले में फैसला लेने के लिए दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में माकपा महासचिव प्रकाश करात ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तेलंगाना मुद्दे पर तत्काल फैसला लेने की मांग की है। करात के अनुसार सरकार को राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश में अब और समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। तेलंगाना और आंध्रप्रदेश पर समिति को रिपोर्ट सौंपे नौ महीने हो गए हैं। श्रीकृष्णा आयोग के सामने राज्य की सभी पार्टियां अपना रुख पहले ही साफ कर चुकी है और सरकार को उसके आधार पर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए।

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