जेनेवा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि वह स्विट्जरलैंड में भारतीय समुदाय से बहुत खुश हैं। उन्होंने वहां बसे भारतीयों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें भारतीयों पर गर्व है जो कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। रविवार को हुए समारोह में भारतीय राजदूत शिप्रा नारायणन सहित 300 भारतीय उद्योगपति मौजूद थे। भारतीय कंपनियों ने वहां 1991 में पांव पसारे और 2003 के दौरान रिकार्ड विकास दर दर्ज की गई। गांधी जयंती के अवसर पर पाटिल ने जेनेवा में बापू गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि अहिंसा परमो धर्म के सूत्र को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गांधी जी स्विटजरलैंड की यात्रा पर 1931 में आए थे। दुनियाभर में दो अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र, संघवाद और शासन के कायदे कानून को लेकर भारत और स्विटजरलैंड के बीच कई समानताएं हैं। ज्ञातव्य हो कि यहां बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी यूनिवर्सिटी ऑफ लॉसन में पढ़ते हैं। हर वर्ष प्रवासी सभ्यता दिवस मनाया जाता है जो इस बार जनवरी 2012 में जयपुर शहर में आयोजित होगा। समारोह में यूनिवर्सिटी ऑफ लॉसन में भारतीय स्टडीज की चेयर स्थापित किए जाने के दो कारण बताए गए। पहला कारण रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती का अवसर और दूसरा विख्यात फ्रेंच फिलॉसफर रोमा रोलां और गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जेनेवा में अगस्त 1930 के दौरान हुई मीटिंग। परमाणु अनुसंधान केंद्र सर्न पहुंचने पर राष्ट्रपति ने वहां डायरेक्टर जनरल डॉ. राबर्ट एमर से औपचारिक बैठक व विज्ञानियों से बातचीत की। गर्व का विषय है कि सर्न में ब्रह्मांड की संरचना, उत्पत्ति और अस्तित्व को लेकर चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट एलिस में 140 भारतीय वैज्ञानिक भी लगे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी और जम्मू यूनिवर्सिटी के विज्ञानी भी परमाणु अनुसंधान केंद्र सर्न से जुड़े हैं। भारतीय मीडिया ने रविवार को केंद्र के भीतर प्रवेश कर रोमांचक अनुभव प्राप्त किया। यह केंद्र पृथ्वी के 60 फीट नीचे निर्मित है और प्रोटोंस से घिरे होने के कारण काफी संवेदनशील है। दैनिक जागरण की स्टेट हेड ने जम्मू यूनिवर्सिटी से आई अनुसंधानकर्ता डॉ.रेणु बाला से मुलाकात की। विज्ञानी रेणु सर्न का कहना था कि वे चार सालों से काम कर रही हैं और इटली में रह रही हैं।
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