Saturday, June 30, 2012

ईरान से तेल आयात करना पाकिस्तान को पड़ेगा महंगा


ईरान से तेल आयात को लेकर पाकिस्तानी वित्तीय संस्थान अमेरिकी कानून से प्रभावित हो सकते हैं। ईरान को लेकर अमेरिकी प्रतिबंध वाला कानून शुक्रवार से लागू हो गया। पाकिस्तान को अब तक अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट नहीं दी गई है, जबकि भारत और 19 अन्य देशों को छूट प्रदान कर दी गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के मुताबिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान उन 20 देशों में शामिल नहीं है, जिसने ईरान से तेल आयात में महत्वपूर्ण कमी की है। जिन 20 देशों को प्रतिबंधों से छूट दी गई है उनकी घोषणा तीन चरणों में की गई है। अंतिम चरण में चीन और सिंगापुर को प्रतिबंधों से छूट दी गई है। इनके अलावा बेल्जियम, ब्रिटेन, चेक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, भारत, मलेशिया, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, श्रीलंका, ताइवान और तुर्की को प्रतिबंधों से छूट दी जा चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को छूट नहीं दिए जाने का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। छूट नहीं मिलने से पाकिस्तान के वित्तीय संस्थानों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कड़े कदम उठाए हैं जिसमें ईरान से तेल निर्यात रोकना भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) के मुताबिक 2011 में ईरान का कच्चे तेल का निर्यात लगभग 25 लाख बैरल प्रतिदिन रहा था। अब यह घटकर 15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। इसका मतलब यह हुआ कि ईरान को प्रत्येक तिमाही में आठ अरब डॉलर (करीब 450 अरब रुपये) के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सांसदों ने जताई निराशा अमेरिका द्वारा ईरान से तेल आयात के मुद्दे पर चीन को प्रतिबंधों से छूट दिए जाने पर अमेरिकी सांसदों ने निराशा जताई है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के ऊपरी सदन सीनेट के सदस्य जॉय लीबरमैन ने कहा, ओबामा प्रशासन द्वारा ईरान से तेल आयात के मुद्दे पर चीन को प्रतिबंधों से छूट दिए जाने के निर्णय से मैं बहुत निराश हूं।

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