ग्रीस में हुए संसदीय चुनाव में बेलआउट पैकेज समर्थक दक्षिणपंथी न्यू डेमोक्रेसी पार्टी की जीत से वैश्विक आर्थिक संकट के और गहराने का खतरा फिलहाल टलता दिखाई दे रहा है। ग्रीस चुनाव पर दुनियाभर की नजरें गढ़ी थीं, क्योंकि अगर यहां वामपंथी सत्ता में आ जाते तो इस देश का यूरोजोन से बाहर जाना तय था। यदि ऐसा होता तो यूरोजोन में आर्थिक संकट और गहरा जाता, जिसका बुरा प्रभाव भारत समेत दुनिया भर के देशों पर पड़ता। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग्रीस चुनाव से पहले ही चेता दिया था कि अगर ग्रीस में बेल आउट समर्थक पार्टी नहीं जीती तो इसका असर भारत पर भी पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों से चल रहे ग्रीस संकट की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत घटी है। इससे भारतीय कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी प्रकार से जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलेंड ने भी चिंता जाहिर की थी। बहरहाल, ताजा परिणामों से फौरी राहत मिल गई है और अब सभी को ग्रीस में नई सरकार गठित होने का इंतजार है। ग्रीस में रविवार को हुए संसदीय चुनाव में 129 सीटें जीतकर न्यू डेमोक्रेसी सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है। हालांकि, आशंका के मुताबिक ग्रीसवासियों ने खंडित जनादेश ही दिया है, लेकिन न्यू डेमोक्रेसी पार्टी का दावा है कि इस बार वह सरकार गठित कर लेगी। ग्रीस में सरकार बनाने के लिए 151 सीटों की जरूरत है। ध्यान रहे कि ग्रीस में छह सप्ताह के भीतर दूसरी बार आम चुनाव हुए हैं। इससे पहले छह मई को आम चुनाव हुए थे, जिसमें न्यू डेमोक्रेसी सबसे बड़ा दल तो था, लेकिन उसे केवल 108 सीटें मिल सकी थीं। इस बार उसे 21 सीटें ज्यादा मिली हैं, ऐसे में पूरी उम्मीद है कि न्यू डेमोक्रेसी पार्टी सरकार बनाने में सफल रहेगी। पार्टी के नेता एंडोनिस समारास ने सोमवार को दूसरे नंबर पर रहे वामपंथी दल सिरीजा के प्रमुख एलेक्सिस सिप्रास से वार्ता शुरू कर दी है। वह अन्य छोटे दलों से भी बात कर रहे हैं, क्योंकि सिप्रास ने कह दिया है कि वह गठबंधन सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। सिरीजा पार्टी बेलआउट पैकेज के लिए रखी गई शर्तो के खिलाफ है। मई में दोनों प्रमुख दलों के बीच इसी बात को लेकर विवाद था, जिसकी वजह से गठबंधन सरकार नहीं बन पाई थी। यूरोजोन समूह के वित्त मंत्रियों के प्रमुख ज्यां क्लॉड ने कहा कि आर्थिक सुधार ही ग्रीस की मुश्किलों का हल है। यूरोपीय संघ ने ग्रीस के वोटरों की हिम्मत की दाद दी है। ध्यान रहे कि ग्रीस को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ से 138 अरब डॉलर (75.9 खरब रुपये) और 130 अरब यूरो (91 खरब रुपये) के दो बेलआउट पैकेज मिल चुके हैं। कर्ज में डूबे ग्रीस की अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर है, लेकिन राजनीतिक सहमति नहीं बन पाने के कारण ग्रीस ने अभी तक बेलआउट पैकेज की शर्ते स्वीकार नहीं की हैं। ग्रीस अगर ऐसा नहीं करता तो उसे यूरोजोन से जाना होगा। हालांकि, अब इसकी संभावना कम है, क्योंकि हाल में जीतने वाली न्यू डेमोक्रेसी पार्टी बेलआउट पैकेज की शर्ते लागू करने और यूरोजोन में बने रहने का समर्थन करती है। फ्रांस के संसदीय चुनावों में सोशलिस्ट पार्टी की जीत पेरिस : फ्रांस के संसदीय चुनावों में सोशलिस्ट पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। पार्टी ने 577 सीटों वाली नेशनल असेंबली में 300 से ज्यादा सीटें जीत ली हैं। हालांकि, अभी तक परिणामों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सोशलिस्ट पार्टी को 312 से 326 सीटें मिलना लगभग तय है। फ्रांस में रविवार को संसदीय चुनाव के लिए दूसरे दौर का मतदान हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों की राय में यह चुनाव परिणाम फ्रांस की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संवारने में सहायक साबित होंगे। संसद में बहुमत मिलने से देश के नए राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलेंड के हाथ मजबूत हुए हैं। अब उन्हें आर्थिक सुधारों के लिए विपक्ष का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। संसदीय चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की पार्टी यूएमपी को 212 से 234 सीटें मिलने का अनुमान है। फ्रांस में 17 साल बाद सोशलिस्ट पार्टी की लहर दिख रही है। ध्यान रहे कि फ्रांसुआ ओलेंड की पार्टी की संसदीय चुनाव में जीत से यूरोजोन के उस आर्थिक समझौते पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसे पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने तैयार किया था। ओलेंड इस समझौते धुर विरोधी हैं। हाल ही में उन्होंने यूरोजोन के देशों को एक नया आर्थिक प्रस्ताव भी भेजा है। देखना यह होगा कि ओलेंड के प्रस्ताव पर यूरोजोन के बाकी देश कैसी प्रतिक्रिया देंगे।
No comments:
Post a Comment