ब्राजील में चल रहे रियो+20 शिखर सम्मेलन के घोषणा पत्र के मसौद में भारत की ओर से उठाए गए दो प्रमुख मुद्दों को शामिल कर लिया गया है। पर्यावरण को बचाने के लिए हो रहे इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के शासनाध्यक्ष और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ गई केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने बताया कि भारत के जोर देने पर मसौदे में साझा, लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारी के सिद्धांत को फिर से शामिल कर लिया गया है। इस सिद्धांत का मतलब यह है कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए मुख्यत: जिम्मेदार होने के कारण विकसित देशों को पर्यावरण बेहतर बनाने की अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र पर्यावरण अनुकूल कार्यक्रमों के वित्त पोषण में वचनबद्धता से भाग रहे हैं। जयंती ने कहा, हमें खेद है कि विकसित देशों में विकासशील देशों को बेहतर साधन उपलब्ध कराने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है, लेकिन हमें खुशी है कि हम दो महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं पर सहमत हो चुके हैं-एक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और दूसरा वित्त। ये दोनों प्रस्ताव भारत ने दिए थे, जिसका जी-77 समूह के देशों ने प्रबल समर्थन किया। रियो+20 सम्मेलन से दक्षिण एशिया की उम्मीदें ब्राजील में चल रहा तीन दिवसीय रियो+20 सम्मेलन दक्षिण एशियाई देशों के लिए ऊर्जा हासिल करने के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सम्मेलन में अगर स्वच्छ ऊर्जा पर सहमति बनी तो क्षेत्र में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। ध्यान रहे कि सम्मेलन के एजेंडे में ग्रीन इकोनॉमी सबसे ऊपर है। इसी वजह से दक्षिण एशिया में ऊर्जा के विकास को लेकर आशा बंधती है। नेपाल, भूटान जैसे देश और भारत के कुछ हिस्सों में हाइड्रो पावर या जलशक्ति के विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं। क्षेत्र के दूसरे देशों में सौर ऊर्जा का अच्छा उत्पादन हो सकता है। ऊर्जा के इन सभी स्रोतों को स्वच्छ ऊर्जा के नाम से पुकारा जाता है, क्योंकि ये पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना विकास को संभव बनात हैं। भारत की बात करें तो कोयले और तेल जैसे बुरे ईंधनों पर उसकी निर्भरता बहुत ज्यादा है। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए विकसित देश उस पर भारी दबाव बना रहे हैं। चीन की भी स्थिति ऐसी ही है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत ने सालाना ऊर्जा उत्पादन की दक्षता को बेहतर नहीं किया तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में उसकी भागीदारी बढ़ती जाएगी। देखना रोचक होगा कि रियो+20 से दक्षिण एशियाई नेता क्या लेकर लौटते हैं? पर्यावरण अनुकूल परिवहन के लिए 175 अरब डॉलर निवेश रियो डि जेनेरियो, आइएएनएस : आठ बहुपक्षीय विकास बैंकों ने बुधवार को घोषणा की है कि आने वाले दशक में वे पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली के लिए 175 अरब डॉलर का निवेश करेंगे। एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष हारूहिको कुरोडा ने बहुपक्षीय विकास बैंकों की ओर से रियो डी जेनेरियो में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तेजी से हो रहे मशीनीकरण से भीड़-भाड़, वायु प्रदूषण, दुर्घटना और ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन बढ़ रहा है-खासकर विकासशील देशों में। विकासशील देशों को सीधे कम मशीनीकरण और अधिक ऊर्जा सक्षम परिवहन प्रणाली वाले पर्यावरण अनुकूल भविष्य में पहुंचने का अवसर मिला है। यह घोषणा एडीबी, विश्व बैंक और छह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों ने पर्यावरण अनुकूल विकास (रियो+ 20) पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की शुरुआत में की। यूएन-हेबिटेट के कार्यकारी निदेशक जॉन क्लोज ने कहा कि इससे हजारों जीवनों की रक्षा होगी क्योंकि इससे वायु स्वच्छ होगी, सड़क सुरक्षित होगी, सैकड़ों शहरों में भीड़ भाड़ घटेगी और नुकसानदेह जलवायु प्रदूषण में परिवहन का योगदान घटेगा। उन्होंने कहा, इससे अधिक सक्षम यात्री और ढुलाई परिवहन का विकास होगा और पर्यावरण अनुकूल शहरी आर्थिक विकास होगा।
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