ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली पाकिस्तान
के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ को आज तक कारगिल
युद्ध के लिए कोई अफसोस नहीं है। भारतीय जमीन पर मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध
को सही साबित करने की कोशिश भी की। पाकिस्तान से निर्वासित मुशर्रफ ने
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि रिश्तों को सुधारने के लिए सही
नीयत की जरूरत है। उन्होंने दोनों मुल्कों के बीच सैन्य टकराव घटाने की पैरवी
की। जब उनसे कारगिल के पीछे उनकी नीयत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने
सीनाजोरी के अंदाज में कहा, पाकिस्तान
की नीयत वही थी, जो
1971 में
पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के विभाजन के पीछे भारत की थी। वर्ष
1999 में
पाकिस्तानी सेना ने भारत में घुसपैठ की थी। करीब दो महीने तक चली
लड़ाई के बाद पाक को अपनी फौजें वापस लौटानी पड़ीं। हालांकि, पाकिस्तान
इस बात से इन्कार करता रहा कि कारगिल में घुसपैठ करने वाले उसके सैनिक
थे। मुशर्रफ की दलीलों पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने
पूछा कि क्या पाक सेना की कश्मीर मामले को सुलझाने की नीयत है। जवाब में
मुशर्रफ ने कहा, यह
सोचना गलत है कि पाक सेना कश्मीर समस्या को सुलझाना नहीं
चाहती। पाकिस्तान में 1999 से
2008 तक
सत्ता के शीर्ष पर रहे मुशर्रफ ने आइएसआइ द्वारा आतंकियों
को शह देने पर भी कोई जानकारी होने से इन्कार किया।
उन्होंने इतना जरूर कहा कि पाकिस्तान में चरमपंथ और आतंकवाद सरकार के नियंत्रण
से बाहर है। भारत-पाक
के बीच लंबित मुद्दों के समाधान की कोशिशों पर पाक के पूर्व राष्ट्रपति
ने कहा, 2007 में
मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आने का न्योता दिया था। साथ
ही सियाचिन व सरक्रीक को सुलझाने का आग्रह भी किया था। मैं
नहीं जानता कि सिंह क्यों नहीं आए। शायद इसलिए कि मेरे खिलाफ पाकिस्तान
में प्रदर्शन हो रहे थे। 2008 में
हुए चुनावों और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के
बाद मुशर्रफ को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था। लंदन में
राजनीतिक निर्वासन बिता रहे मुशर्रफ अब पाकिस्तान लौटने की
तैयारी कर रहे हैं। (पेज-5 भी
देखें)
Dainik jagran National Edition 18-11-2012 Page -1 (ns’k fons’k)
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