Monday, December 19, 2011

अरब क्रांति के अगुआ बुअजीजी को श्रद्धांजलि


आज से ठीक एक साल पहले ट्यूनीशिया में ख़ुद को आग लगाने वाले फल विक्रेता मोहम्मद बुअजीजी ने सरकारी तंत्र के खिलाफ आंदोलन को जन्म दिया था। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ट्यूनीशिया में एक मूर्ति का अनावरण किया गया है। बुअजीजी की ख़ुदकुशी के बाद 23 साल से सत्ता पर काबिज बेन अली के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बुअजीजी के आत्मदाह के बाद सिदी बूजीद में शुरू हुआ विद्रोह धीरे-धीरे संपूर्ण अरब देशों में फैल गया। बुअजीजी को श्रद्धांजलि देने वालों में वर्तमान राष्ट्रपति मोसेफ मरजाउकी भी शामिल हुए, जिन्होंने सिदी बूजीद में मोहम्मद बुअजीजी की याद में आयोजित समारोह में लोगों का अभिवादन किया। बुअजीजी को 90 प्रतिशत तक जली हुई अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पांच जनवरी 2011 को उनकी मौत हो गई थी। इस साल अक्तूबर महीने में ट्यूनीशिया में पहली बार हुए भ्रष्टाचार मुक्त चुनावों में राष्ट्रपति चुने गए मोसेफ मरजाउकी ने, ट्यूनीशिया के लोगों को उनका सम्मान वापस दिलाने के लिए बुअजीजी का शुक्रिया अदा किया। 26 साल के बुअजीजी अपने मोहल्ले में फलों के ठेले की जगह लॉरी लगाना चाहते थे, लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार के अधिकारियों से इजाजत नहीं नहीं मिल रही थी। उनके घरवालों के अनुसार वहां के तीन अधिकारी बुअजीजी से रिश्वत की मांग कर रहे थे। रिश्वत न देने पर उन अधिकारियों ने सामान जब्त कर उनके साथ मारपीट की थी। बुअजीजी इसकी शिकायत गवर्नर से करना चाहते थे, लेकिन जब वह भी उनसे नहीं मिले तब उन्होंने हारकर ख़ुद को आग लगा ली। यहीं से अरब क्रांति की मशाल जली जिससे ट्यूनीशिया के अलावा मिस्त्र, लीबिया और यमन में वषरें से चल रही सरकारों का न सिर्फ अंत हुआ बल्कि लोकतंत्र की नींव भी रखी गई। इन देशों में हुए आंदोलनों का असर सीरिया में भी देखा जा रहा है जहां राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं।

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