भारत और चीन के बीच नई दिल्ली में हुई चौथे दौर की सालाना रक्षा वार्ता ने सैन्य संबंधों पर जमी बर्फ को कुछ कम किया लेकिन संबंधों में जकड़न बरकरार है। करीब दो साल बाद नई दिल्ली में हुई इस बातचीत में दोनों खेमों की राय यही थी कि फिलहाल किसी बड़े कदम की बजाए छोटे डग भरना ही बेहतर है। सीमा पर सैन्य अधिकारियों की मुलाकात को लिपुलेख दर्रे से बदलकर माना दर्रे पर किए जाने के भारतीय प्रस्ताव पर चीन ने केवल गौर करने का भरोसा ही दिया। रक्षा मंत्रालय में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जनरल मा श्याओ थेन और रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा की अगुवाई में हुई बातचीत के दौरान बीते तीन सालों से टल रही सैन्य अभ्यास की तारीखों को लेकर भी कोई सहमति नहीं बन सकी। महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच 2008 में भारत के बेलगाम और 2009 में चीन के कुनमिंग में साझा सैन्य अभ्यास हुआ था। रक्षा मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक साझा अभ्यास का फैसला निचले स्तर पर वार्ता स्तर बातचीत के जरिए होगा। रक्षा मंत्रालय प्रवक्ता सितांशु कार के अनुसार काफी अच्छे माहौल में हुए बातचीत के दौरान रक्षा संबंधों और सैन्य संवाद बढ़ाने पर भी सहमति बनी। साथ ही दोनों खेमों ने स्वीकार किया की बेहतर सैन्य संवाद आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने में कारगर होगा। दोनों पक्षों का मानना था कि विभिन्न स्तर पर सैन्य आदान-प्रदान का दायरा धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि चीन के साथ विश्वास बहाली के नए प्रस्तावों के बारे में पूछे जाने पर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि बातचीत हुई यही अपने आप में विश्वास बढ़ोतरी का कदम है। सूत्रों के मुताबिक करीब तीन घंटे चली बातचीत में इस बात पर रजामंदी जरूर बनी की इस महीने चीनी सैन्य प्रतिनिमंडल भारत दौरे पर आएगा। साथ ही जनवरी 2012 में भारतीय सेना का एक प्रतिनिधिमंडल चीन जाएगा। भारत की ओर मध्य स्तर के सैन्य अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा। करीब 21 महीने बाद हुए रक्षा संवाद के दौरान दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने के लिए 2005 के प्रोटोकॉल के कड़ाई से अनुपालन की जरूरत पर भी जोर दिया। नियंत्रण रेखा पर विश्वास बहाली के लिए भारत ने सीमा पर सैन्य अधिकारियों की बातचीत का स्थान दोनों देशों के बीच खुले व्यापारिक गलियारे लिपुलेख दर्रे की बजाए माना दर्रे तक ले जाने का भी प्रस्ताव दिया। चीन ने इस पर विचार करने का भरोसा दिया है। कुमाऊं क्षेत्र स्थित लिपुलेख दर्रा तिब्बत के पुरंग को जोड़ता है। 1992 में यह दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार के लिए खोली गई पहली पोस्ट है। वहीं माना दर्रा या डुंगरी-ला भारत और चीन के तिब्बत क्षेत्र को जोड़ता है। जनरल थेन की अगुवाई में आए छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी और तीनों सेना प्रमुखों की समिति के मुखिया एडमिरल निर्मल वर्मा से भी मुलाकात की।
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