बीजिंग, एजेंसी : पूर्वी
चीन सागर के विवादित द्वीपों को लेकर जापान के साथ जारी तनाव के बीच
चीन ने मंगलवार को पहले विमान वाहक पोत को नौसेना में शामिल किया। पूर्वोत्तर
चीन केडालियान शहर स्थित नौ सेना के बेस पर आयोजित एक समारोह में
इसे आधिकारिक रूप से नौसेना को समर्पित किया गया। इस मौके पर चीनी राष्ट्रपति
हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भी मौजूद थे। साठ हजार टन
का यह पोत यूक्रेन से एक जहाज को लाकर बनाया गया है। इस पुनर्निमित जहाज को
लायोनिंग नाम दिया गया है। इस नाम के प्रांत को चीन ने 1945 में
जापान के
कब्जे से छुड़ाया था। इसे टोक्यो के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। चीन
के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 300 मीटर
लंबे इस
पोत से चीन की संप्रभुता की रक्षा करने और गैर पारंपरिक खतरों से निपटने में
मदद मिलेगी। इस पोत में 33 विमान
आ सकते हैं। चीन की योजना तीन ऐसे ही विमान वाहक पोत बनाने
की है। यूक्रेन
से लाए गए इस विमानवाहक पोत को वारयाग के नाम से जाना जाता था, जिसे
1980 में
सोवियत संघ की नौसेना के लिए तैयार किया गया था। 1991 में सोवियत
संघ के टूटने के बाद वारयाग यूक्रेन के पास रह गया। इसे इंजन और अन्य
उपकरणों से लैस करने में करीब सात साल का समय लगा। पूरी तरह तैयार होने
के बाद इस पोत का एक साल तक समुद्र में परीक्षण किया गया। इस विमानवाहक
पोत को नौसेना में शामिल करने के साथ सक्रिय सेवा में विमानवाही पोत
रखने वाला चीन दुनिया का दसवां और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच
स्थायी सदस्यों में अंतिम देश बन गया है। विवादित द्वीपों को
लेकर चीन ने
जारी किया श्वेतपत्र दियाओउ द्वीप समूह को पर जारी विवाद के
बीच चीन ने मंगलवार को श्वेतपत्र जारी कर इन द्वीपों
पर जापान के संप्रभूता के दावे को नकार दिया है। इसके मुताबिक
इस द्वीप समूह पर चीन का वर्षो से अधिकार रहा है। श्वेतपत्र में ऐतिहासिक
तथ्यों का हवाला देते हुए इस निर्जन द्वीप समूह पर चीन का अधिकार बताया
गया है। चीन सरकार द्वारा जारी श्वेतपत्र के मुताबिक दियाओउ द्वीप समूह
पर चीन का शताब्दियों पूर्व उस वक्त से अधिकार रहा है, जब
जापान ने इसका
पता भी नहीं लगाया था। मालूम हो कि जपान में इस द्वीप समूह को सेनकाकू के
नाम से जाना जाता है। इसको लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब जापान ने निजी स्वामित्व
वाले इस द्वीप को इस महीने खरीद लिया। चीन ने जापान के इस कदम का कड़ा
विरोध किया। तनाव कम करने के लिए दोनों देश वार्ता कर रहे हैं। लेकिन चीन
के इस कदम से इस क्षेत्र में तनाव के फिर से बढ़ने के आसार बन गए हैं।
Friday, September 28, 2012
परमाणु हथियार विकसित कर रहा पाकिस्तान
न्यूयॉर्क, एजेंसी : पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ
अली जरदारी ने अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के
साथ मुलाकात के दौरान पाकिस्तान और भारत के बीच सुधरते व्यापारिक
संबंध, आतंकवाद
और अमेरिका विरोधी हिंसक प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जरदारी ने इस्लाम
विरोधी फिल्म के मुद्दे को हिलेरी के समक्ष उठाया। हिलेरी ने दोहराया
कि हिंसा भड़काने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरदारी मंगलवार
को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच आर्थिक
संबंधों को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय निवेश संधि पर इस साल के अंत
तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई।
दैनिक जागरण
राष्ट्रीय संस्करण, पेज 7,
26-09-2012 ns’k fons’k
ईरान ने फिर दोहराया, इजरायल का सफाया होकर रहेगा
न्यूयॉर्क, एजेंसी : ईरान के राष्ट्रपति महमूद
अहमदीनेजाद ने संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी को नजरअंदाज
करते हुए कहा कि इजरायल का जल्द ही सफाया हो जाएगा। इससे
पहले रविवार को संयुक्त राष्ट्र ने अहमदीनेजाद को भड़काऊ बयानबाजी के खतरों
को लेकर चेताया था। अहमदीनेजाद ने कहा कि इजरायल द्वारा
ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला करने की खबरों को वह
गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सीरिया को हथियार भेजे जाने की
खबरों का खंडन करते हुए उन्होंने भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी
के खिलाफ ईरानी फतवे का भी जिक्र किया। अमेरिका ने ईरान के
राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के बयानों को घृणित, अपमानजनक और आक्रामक
बताते हुए खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 67वें सत्र
में हिस्सा लेने के लिए अहमदीनेजाद न्यूयॉर्क आए हैं। वे बुधवार को महासभा
को संबोधित करेंगे। ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी
गार्ड कोर के ब्रिगेडियर जनरल आमिर अली हाजीजादेह ने रविवार को
कहा था कि यदि इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध
में बदल सकता है। इजरायल
के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान के परमाणु संयंत्र पर
हमले के संकेत दिए हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को सख्त
करने के बाद तेहरान को कूटनीतिक हल के लिए और वक्त दिए जाने के लिए अमेरिकी
राष्ट्रपति बराक ओबामा की आलोचना की है। हालांकि ईरान ने परमाणु हथियार
बनाने से इन्कार किया है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण
उद्देश्यों के लिए है।
दैनिक जागरण
राष्ट्रीय संस्करण, पेज 7 , 26-09-2012 ns’k fons’k
Sunday, September 23, 2012
विश्वास बहाली ही जम्मू-कश्मीर मुद्दे का समाधान : पाकिस्तान
वाशिंगटन, एजेंसी
: विश्वास बहाली और पिछले छह दशकों से चले आ रहे नकारात्मक संबंधों को पीछे छोड़ने से ही भारत के साथ जम्मू-कश्मीर सहित तल्ख
मुद्दों का समाधान संभव है। यह दावा अमेरिका दौरे पर पहुंचीं पाकिस्तानी
विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने विदेश संबंध परिषद में अपने संबोधन के
दौरान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार को
सामान्य करने का प्रयास इसी दिशा में उठाया गया एक कदम
है। उन्होंने कहा, एक बात स्पष्ट है कि हम तब तक शांति
प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, जब
तक हमारी सीमाएं शांत नहीं होती। अत: पड़ोसी के लिए सोच बदलने की जरूरत है। खासतौर से तब जब हमारे बीच खटास भरे रिश्ते हैं। बाद में एक सवाल के जवाब में खार ने बताया कि ओसामा बिन लादेन
के पाकिस्तान में होने के मामले की जांच कर रहे स्वतंत्र जांच आयोग की
रिपोर्ट अक्टूबर तक मिल जाएगी। एबटाबाद नामक इस आयोग का
गठन लादेन के पिछले वर्ष दो मई को एबटाबाद में अमेरिकी
सैनिकों द्वारा मार गिराए जाने के बाद किया गया था। अमेरिकी
खुफिया रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि इस संबंध में पाकिस्तानी सरकार या संबंधित प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि
लादेन को ढूंढ़ने में सीआइए की मदद करने वाले डॉक्टर शकील आफरीदी को
अमेरिका को हीरो की तरह प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर शकील के कारण अब स्थिति यह है कि पाकिस्तान में बच्चों
के भविष्य और पोलियो के खिलाफ काम करने वालों को लोग सम्मान
नहीं देते। पोलियो के खिलाफ 20 साल से लड़ी जा रही लड़ाई में सिर्फ इस आदमी के कारण अब पाकिस्तान में पोलियो चिंता का कारण बनती
जा रही है। हमें उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करना चाहिए।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -7,23-9-2012
ns’k fons’k
Subscribe to:
Comments (Atom)