भारत और चीन के बीच रक्षा संबंध सुधारने की कोशिशों के बीच नई दिल्ली ने अपने सबसे बड़े हथियार मेले से चीनी कंपनियों को दूर रखने का फैसला लिया है। विदेश मंत्रालय ने अगले माह राजधानी में होने वाले द्विवार्षिक डिफेंस एक्सपो-2012 में चीनी कंपनियों की शिरकत का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीन के साथ ताइवान की हथियार कंपनियों के लिए भी इस शस्त्र प्रदर्शनी में नुमाइश की इजाजत नहीं होगी। सूत्र बताते हैं कि विदेश मंत्रालय ने करीब दो हफ्ते के मंथन के बाद मेजबान रक्षा मंत्रालय को अपने इस फैसले की जानकारी दे दी। हालांकि विदेश मंत्रालय का यह फैसला विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के बीजिंग दौरे पर रवानगी से ठीक पहले आया। महत्वपूर्ण है कि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा बुधवार से तीन दिनी चीन दौरे पर हैं। कृष्णा के एजेंडे में दोनों देशों की संवाद प्रक्रिया सुधारने के अलावा अगले महीने प्रस्तावित चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के भारत दौरे की भूमिका तैयार करना भी शामिल है। हालांकि चीनी कंपनियों को बाहर रखने का भारतीय फैसला चीन के साथ बीते दिनों सीमा विवाद पर हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर वार्ता, सैन्य प्रतिनिधि मंडलों की आवाजाही और रक्षा संवाद सुधारने की कोशिशों के बीच आया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने चीन को अपनी रक्षा प्रदर्शनी से बाहर रखने का फैसला किया है। इससे पहले रक्षा संबंधों की तल्खी के चलते 2011 के एयरो इंडिया शो में भारत ने चीनी कंपनियों को इस मेले से बाहर रखा था। वहीं फरवरी 2010 में हुए डिफेंस एक्सपो में भी चीन और पाकिस्तान को न्यौता नहीं दिया गया था। 2009 के एयरो इंडिया शो में भारत ने चीन को शिरकत का न्यौता दिया था लेकिन बीजिंग ने उसमें भाग नहीं लिया था। रक्षा मंत्रालय एक साल डिफेंस एक्सपो और एक साल एयरो इंडिया शो का आयोजन करता है। मार्च 29 से अप्रैल 1, 2012 के बीच नई दिल्ली के प्रगति मैदान में होने वाले डिफेंस एक्सपो में इटली, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, रूस, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, पोलैंड, तुर्की, इजराइल और ब्रिटेन समेत कई देश अपने पैवेलियन स्थापित कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी 2010 में हुए डिफेंस एक्सपो में 31 देशों ने अपने उत्पादों की नुमाइश की थी।
No comments:
Post a Comment