भारत और पाकिस्तान का आपसी रिश्ता हमेशा कभी नीम-नीम, कभी शहद-शहद जैसा रहा है। द्विपक्षीय रिश्तों को मधुर बनाने के लिए कोशिशें शुरू होती हैं और अचानक इस पर विराम भी लग जाता है। पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ हफ्तों से लगातार भारतीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा की यात्रा के दौरान भारत को सबसे तरजीही देश (एमएफएन) का दर्जा देने के संकेत दे रही थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दिखाई जा सकी। पाक सरकार का कहना है कि अभी इस मुद्दे पर और गहराई से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री गिलानी के खिलाफ मामला दायर करने के बाद उपजी राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस फैसले को टाला गया है। चूंकि पूरी कैबिनेट ने गिलानी में भरोसा जताया है, लिहाजा वह अभी भारत को फायदा पहुंचाने वाला कोई फैसला लेकर जोखिम नहीं उठाना चाहते। यही वजह है कि पाक सरकार ने भारत को अभी एमएफएन का दर्जा देना मुल्तवी कर दिया है। तीन अहम समझौतों को मंजूरी अलबत्ता पाकिस्तानी सरकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाने से संबंधित तीन महत्वपूर्ण समझौतों को मंजूरी दे दी है। पाक सरकार का मानना है कि भारत से आयातित उत्पादों की सकारात्मक सूची के बजाय नकारात्मक सूची होनी चाहिए। इसलिए पाकिस्तान करीब 650 उत्पादों को छोड़कर शेष उत्पादों को भारत से आयात की मंजूरी देने पर राजी हो गया है। अभी पाक भारत से लगभग 1960 उत्पादों का आयात को मंजूरी देता है। इसके अलावा सरकार ने दिसंबर, 2012 तक भारत को एमएफएन का दर्जा देने की बात प्रस्ताव में कही है। संवेदनशील मामला कैबिनेट की बैठक में यह महसूस किया गया कि ये काफी संवेदनशील मुद्दे हैं। यह अलग बात है कि एमएफएन का दर्जा मिलने से ज्यादा फायदा पाक को ही होने वाला है। भारत पाक को एमएफएन का दर्जा काफी पहले दे चुका है। इस दर्जे से दोनों देशों के व्यापार विश्व व्यापार संगठन के नियमों के दायरे में आ जाएंगे। निराश नहीं उद्योग जगत भारत और पाकिस्तान का उद्योग जगत पाक सरकार के फैसले से बहुत ज्यादा निराशा नहीं है। फिक्की अध्यक्ष आरवी कनोरिया ने कहा कि अगर यह मंजूरी मिल जाती तो काफी अच्छा होता। मगर इससे साफ है कि सरकार उद्योग जगत की उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं कर रही है। सीआइआइ के अध्यक्ष बी मुत्थुरमन ने कहा कि पाक सरकार ने भले ही इसे फिलहाल टाल दिया हो, लेकिन इसे ज्यादा दिनों तक स्थगित नहीं रखा जा सकता। पाक सरकार ने पिछले वर्ष ही फैसला किया था कि भारत के साथ कारोबार के रास्ते से हर अड़चन हटाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि गिलानी सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट विवाद के निपटने के बाद पाक की केंद्र सरकार भारत को एमएफएन का दर्जा देने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। पाक के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से तैयार प्रस्ताव के मुताबिक, खाद्य व कृषि उत्पादों, खनिज, रसायन, फार्मा, प्लास्टिक, रबड़, लकड़ी, कागज, कपड़े, स्टील, लोहा, ऑटो क्षेत्र के उत्पादों का आयात भारत से अभी संभव नहीं होगा। इन उत्पादों के अलावा हर उत्पाद के आयात की अनुमति होगी। इस नकारात्मक सूची को भी दिसंबर, 2012 से समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है।
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