Wednesday, February 15, 2012

रूसी वैज्ञानिकों का कुडनकुलम छोड़ने का फैसला


पहले से ही संकट में फंसी कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना को रूस द्वारा अपने वैज्ञानिकों को वापस बुलाने के फैसले से एक और बड़ा झटका लगा है।भारत में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर एम कदाकिन ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। कदाकिन ने कहा कि जब यहां कोई काम ही नहीं हो रहा तो ऐसे में वहां वैज्ञानिकों को रखने का कोई औचित्य नहीं है। रूस द्वारा यह कदम तब उठाया जा रहा है जब सरकार को उम्मीद है कि इस गतिरोध को अब जल्द ही निपटा लिया जाएगा। पिछले सप्ताह इसके लिए तमिलनाडु सरकार ने एक पैनल का भी गठन कर दिया है जो आंदोलनकारियों की आशंकाओं को दूर करने का काम करेगा। कुडनकुलम परमाणु परियोजना के विरोध में पिछले कुछ महीनों से स्थानीय लोगों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने भी गतिरोध हल होने तक संयंत्र में केवल आपातकालीन कार्य के संचालन की ही अनुमति दी है। कदाकिन ने कहा कि इस संयंत्र में वैज्ञानिक कोई काम नहीं कर पा रहे हैं, जबकि अन्य जगहों पर उनकी आवश्यकता महसूस की जा रही है। राजदूत ने बताया कि भारत-रूस द्वारा बनाया जा रहा कुडनकुलम संयंत्र काफी सुरक्षित है और इसकी पहली दो इकाई पूरी तरह तैयार है। तिरुनेलवेली जिले में रूस के सहयोग से भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआइएल) द्वारा बनाए जा रहे इस परमाणु संयंत्र के विरोध में स्थानीय लोग पीएमएएनई के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एनपीसीआइएल के एक अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम से कुडनकुलम संयंत्र पर जारी गतिरोध को तोड़ने में मदद मिलेगी। दूसरी तरफ एनपीसीआइएल ने तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक कर संयंत्र के आसपास के इलाकों में किए जा रहे विकास कार्यो की भी समीक्षा की। मालूम हो कि पिछले सप्ताह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने चार सदस्यों का एक पैनल गठित किया जो स्थानीय लोगों की चिंताओं पर गौर करेगा। इस पैनल में परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एमआर श्रीनिवासन, अन्ना विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसर (डी अरिवू और एस इनीयान) तथा एक सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी एलएन विजयराघवन शामिल हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, देश के प्रख्यात वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम और अन्य विशेषज्ञ कुडनकुलम परमाणु परियोजना को सुरक्षित बता चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने इस बाबत कुडनकुलम संयंत्र का दौरा कर इसे सुरक्षित करार दिया था। साथ ही उन्होंने परमाणु ऊर्जा को देश के लिए आवश्यक बताया था। जापान में फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद से कुडनकुलम संयंत्र का विरोध और तेज हो गया। विरोध प्रदर्शनों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयंत्र में सिर्फ आपातकालीन कार्य ही हो पा रहा है।

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