अग्नि-5 के सफल परीक्षण पर चीन तिलमिला उठा है। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि चीन की परमाणु ताकत अधिक मजबूत है तथा नई दिल्ली इसका मुकाबला करने में अक्षम है। चीन के अधिकांश हिस्सों तक भारत की मिसाइलें पहुंच सकती हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उसे चीन के साथ विवाद के दौरान अहंकारी होने से लाभ मिलेगा। वहीं चीन सरकार ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और उनके बीच बेहतर संबंध हैं। हालांकि इस प्रक्षेपण से क्षेत्र में हथियारों की होड़ का एक और दौर शुरू हो सकता है। सवाल यह है कि चीन स्वयं यह कार्य पहले ही कर चुका है तो फिर वहां का मीडिया ऐसी बातें क्यों कर रहा है। चीन के पास 11500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता वाली अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल डोंग फोंग-31 ए है, जो दक्षिण एशिया में कहीं भी निशाना साध सकती है। इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया गया है। तीन चरणों वाली यह मिसाइल 1800 किलोग्राम वजन के थर्मो न्यूक्लियर वारहेड को ले जा सकती है। डोंग फोंग-31 ठोस ईंधन व तीन चरणों वाली है। यह 1000 किलोग्राम की परमाणु आयुध के साथ 10000 किलोमीटर की दूरी तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन ने भारतीय सीमा पर सीएसएस-5 मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात कर रखी हैं। परमाणु क्षमता से लैस इस मिसाइल को डीएफ-21 के नाम से जाना जाता है। यह 1991 से चीन की सैन्य सेवा में है। इसकी लम्बाई 10.7 तथा व्यास 1.4 मीटर है। इसकी मारक क्षमता 1700 से 3000 किलोमीटर है। डीएफ-21 मिसाइल की गति 10 मैक है। इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया गया है। इन मिसाइलों की जद में कोलकाता, डिब्रूगढ़, नई दिल्ली चंडीगढ़ आदि होंगे। यह मिसाइल 600 किलोग्राम वजन का परमाणु विस्फोटक अपने साथ ले जाने में सक्षम है जो किसी शहर के विध्वंस के लिए काफी है। चीन ने इससे पहले भारतीय सीमा पर सीएसएस-2 आइएमबीएम मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। चीन की डोंग फोंग-3 ए मिसाइल 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर आयुध के साथ 2800 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसमें तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह एक चरण वाली मिसाइल है। दो चरण व तरल ईंधन वाली डोंग फोंग-4 ए मिसाइल 5000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यह मिसाइल भी अपने साथ 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। डोंग फोंग-5 ए में भी तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह भी दो चरण वाली मिसाइल है, लेकिन यह 2000 किलोग्राम के थर्मो न्यूक्लियर वारहेड के साथ 10000 किलोमीटर की दूरी तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन ने भू-आधारित मध्यम दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एसएएम की तैनाती कर दी है जो ऊंची और बेहद नीची उड़ान भरने वाले लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इस प्रणाली को रेड फ्लैग-16 नाम दिया गया है। यह शेनयांग सैन्य क्षेत्र की हवाई रक्षा प्रणाली से जुड़ी होगी। हाल ही में दो एचक्यू-16 मिसाइलें इस यूनिट द्वारा सफलता पूर्वक छोड़ी गई थीं। चीन युद्धपोत रोधी मिसाइलों को प्रशांत महासागर में तैनात कर रहा है। यह एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल डोंग फोंग-21डी मिसाइल का परिवर्धित रूप है। इसकी मारक क्षमता 20000 किलोमीटर की दूरी तक है। यह तेज गति से चल रहे किसी भी युद्धपोत को ध्वस्त करने की क्षमता रखती है। चीन ने अंतरिक्ष में हमला करने वाली नई मिसाइलें विकसित कर ली हैं। चीन ने 12 जनवरी, 2010 को हवा में ही मिसाइल मार गिराने का सफल परीक्षण किया था। इससे पहले जनवरी 2007 में सैटेलाइट निरोधक प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं) भारत-चीन की मिसाइल क्षमताओं पर डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव की टिप्पणी
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