निश्चित रूप से इन दिनों भारत और पाकिस्तान कारोबारी संबंधों को मजबूत करने के लिए एक के बाद एक सही दिशा में कदम आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में 13 अप्रैल को भारत-पाक सीमा पर पहले अटारी-वाघा एकीकृत चेकपोस्ट का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री पी चिंदबरम और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान व्यापार के जरिए अपने संबंधों को सुधारने के लिए राजी हैं। इसके लिए नई सरल वीजा पण्राली तैयार की जाएगी। दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग के जरिए व्यापार में आने वाली बाधाओं को भी दूर किया जाएगा। इसके साथ भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री फहीम ने कहा कि वे एक-दूसरे देश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देंगे। साथ ही साझा कारोबारी परिषद का जल्द गठन किया जाएगा। बहुउद्देशीय कारोबार वीजा एक वर्ष के लिए होगा। जल्द ही इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। भारत और पाक व्यापार के परिप्रेक्ष्य में यह नया परिदृश्य काफी महत्वपूर्ण है। इसके कुछ दिन पहले 8 अप्रैल को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की एक दिवसीय भारत यात्रा अन्य शिखर बैठकों की तर्ज पर होने वाली कोई ऐसी यात्रा नहीं थी जिसमें दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर कोई लंबी-चौड़ी बातचीत होती। लेकिन दोनों देशों के नेता घरेलू राजनीति के मुख्य मुद्दों आतंकवाद और कश्मीर पर अपनी पूर्व स्थिति बरकरार रखते हुए भी कुछ ऐसे मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाने के इच्छुक दिखे जिन पर आसानी से उपयोगी समझौते को अंजाम दिया जा सकता है। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा कारोबार का है। मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के उन कदमों को लाभप्रद बताया, जो उसके द्वारा पिछले कुछ महीनों में भारत के साथ आर्थिक रिश्ते सुधारने की दिशा में उठाए हैं। कहा गया है कि दोनों देश शुल्क और अन्य अड़चनों को दूर करने की दिशा में पहले के मुकाबले अधिक तेजी से कार्रवाई करेंगे। सीमा पार करते वक्त महसूस होने वाली बुनियादी ढांचे की कमी और नियमों तथा मानकों को उपयुक्त बनाए जाने की बात कही गई। कठोर वीजा नियमों को उदार बनाने संबंधी मंतव्य भी व्यक्त किया गया। यह तय हुआ है कि दोनों देशों के कारोबारी एक साल के लिए वीजा प्राप्त कर सकेंगे। कोई दो महीने पहले वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा कारोबारियों के बड़े शिष्टमंडल के साथ पाकिस्तान में इंडिया शो आयोजित करवा चुके हैं। अटारी और वाघा सीमा पर एकीकृत जांच चौकी के पूरी तरह खुल जाने से भारत से पाकिस्तान को पशुधन, साब्जियों और अन्य कई वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। सुविधा पूर्ण यात्रा, कागरे टर्मिनल, उचित सीमा शुल्क और आव्रजन सुविधाओं के मद्देनजर इस आधुनिक चेकपोस्ट के खुलने से दोनों देशों के बीच व्यापार को कई गुना बढ़ाने में मदद मिलेगी। अब ज्यादा से ज्यादा ट्रक सीमा पार कर सकेंगे। यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच खासतौर से शक्कर, चाय, गेहूं, कपास, होजियरी, मशीनरी, कृषि उपकरण, रसायन तथा सॉफ्टवेयर का कारोबार छलांगे लगाकर बढ़ता जाएगा। भारत में पाकिस्तान से आ रही शक्कर अन्य देशों की तुलना में सस्ती होगी। भारत से पाक को भेजी जा रही चाय सस्ती पड़ेगी। भारत चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि पाक चाय का बड़ा आयातक। भारत के गेहूं को पड़ोस में अच्छा बाजार मिलेगा। पाक को दूरस्थ देशों से महंगा गेहूं आयात करना पड़ता है। बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत के कारण भारत का कपास पाकिस्तान में स्थान बनाएगा। भारत-पाक के बीच 2.7 अरब डॉलर का जो कारोबार होता है, उसमें दस गुना इजाफे की संभावना है। निश्चित रूप से पाकिस्तान के द्वारा भारत को पसंदीदा देश का दर्जा दिए जाने के बाद भारत और पाक के कारोबारियों की उम्मीदें गाढ़ी होंगी। वैसे दो नवम्बर 2011 को पाकिस्तान ने भारत को व्यापार के लिए सर्वाधिक पसंदीदा देश (एमएफएन) का दर्जा देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था। पर अब भी इस बारे में पाकिस्तान यही कह रहा है कि भारत को एमएफएन के दज्रे संबंधित अंतिम निर्णय कुछ और उच्च विचारिवर्मश के बाद लिया जाएगा। भारत, पाकिस्तान को एमएफएन देश का दर्जा 1996 में ही दे चुका है। भारत को एमएफएन का दर्जा दिए जाने के बाद भारत के कई उद्योगों मसलन पेट्रोलियम उत्पाद, आयरन और स्टील, फार्मा, केमिकल, भारी उद्योग, ऊर्जा और आईटी उद्योग को फायदा होगा। किंतु वास्तविक लाभ आम उपभोक्ता और कारोबारियों को होगा। सामान पाकिस्तान पहुंचने पर लागत में कमी आएगी। अभी दोनों में से कोई भी देश अपने व्यवसायियों के लिए एक-दूसरे के यहां बैंक खोलने की अनुमति नहीं दे पाया है। इस कारण भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबारों में क्लीयरिंग तेहरान स्थित एशियन क्लीयरिंग यूनियन से होता है। यह सब कार्य धीमी गति से होता है और इससे कारोबार को नुकसान पहुंचता है। वस्तुत: इस समय भारत-पाक की आर्थिक मित्रता के नए कदमों की दोनों देशों के उद्योग- व्यापार जगत के द्वारा उत्सुकता से प्रतीक्षा की जा रही थी। यदि हम पिछले कुछ वर्षो के आर्थिक एवं कारोबारी संबंधों की डगर को देखें तो पाते हैं कि पाकिस्तान के लोगों की आशंका रही है कि मुक्त व्यापार का लाभ केवल भारत को मिलेगा। पाकिस्तान द्वारा मुक्त व्यापार से उसके उद्योग चौपट होने और उसके बाजार भारतीय उत्पादों से भर जाने संबंधी आशंका जताई जाती रही है। वहां कई लोगों की मान्यता है कि वे दक्षिण एशिया से खुद को अलग कर अरब और इस्लामिक दुनिया के साथ संबंध जोड़कर व्यापार में अधिक आगे बढ़ सकते हैं। भारत में भी कुछ लोगों की मान्यता रही है कि भारत पड़ोसियों से खुद को अलग कर पूर्व की ओर व्यापार केंद्रित कर अधिक समृद्ध हो सकेगा। इस विषय पर पाकिस्तान में अर्थ विशेषज्ञ जोरदार चर्चाएं करते रहे हैं कि क्या पाक को अमेरिका, यूरोपीय यूनियन जैसे देशों के साथ ही व्यापार का अनुसरण करना चाहिए या व्यापार के लिए सहयोगी चुनते वक्त उन देशों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए, जो पड़ोसी हैं। तुलना की जाती रही है कि भारत पाकिस्तान के ठीक दरवाजे के सामने है, जबकि अमेरिका, पाकिस्तान से सात हजार मील दूर है। अंतत: पाकिस्तान का आर्थिक मंच इस बात पर एकमत हुआ है कि भारत से अपने व्यापार संबंध बेहतर बनाने पर पाकिस्तान को अब अधिक जोर देना चाहिए। भारत-पाक व्यापार के नए कदम को सार्क देशों के अर्थ विशेषज्ञों ने भी सराहा है। वे यह कह रहे हैं कि भारत-पाक की आर्थिक मित्रता 21वीं सदी में एशिया का आर्थिक महत्व बढ़ा देगी। क्षेत्र के सबसे बड़े देश होने के कारण भारत और पाकिस्तान पर सार्क को पुनर्जीवित करने की खासतौर से जिम्मेदारी है। 1985 में दक्षिण एशिया में शांति, सहयोग और व्यापार बढ़ाने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना की गई थी। आठ देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और अफगानिस्तान इसके सदस्य हैं। मुक्त व्यापार के लिए ठोस कदम दिसम्बर 1995 में ‘साफ्टा’ की स्थापना की पहल के साथ आगे बढ़े। साफ्टा की धीमी गति का सबसे प्रमुख कारण भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष भी रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच यह ऐतिहासिक समय है और दोनों को आपसी कारोबार को आगे बढ़ाने की नई कोशिश को धीमा नहीं पड़ने देना चाहिए। पाकिस्तानी संसद को अब जल्द से जल्द भारत को एमएफएन की औपचारिक घोषणा कर देनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना होगा कि दोनों देशों के बीच कारोबार में मजबूती तभी आएगी, जब एक-दूसरे के यहां निवेश के लिए भी कोशिश तेज की जाएगी। दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर करने में कारोबार और निवेश का अहम योगदान होगा। उम्मीद है कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक मैत्रीपूर्ण संबंधों के नए दौर को दोनों देशों की सरकारें और दोनों देशों के कारोबारी तेजी से आगे बढ़ाएंगे और भारत-पाकिस्तान परस्पर कारोबार से विकास और खुशहाली के नए अध्याय लिखे जाएंगे। भारत-पाक के बीच 2.7 अरब डॉलर का जो कारोबार होता है , उसमें दस गुना इजाफे की संभावना है
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