लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे म्यांमार में रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। उपचुनाव में प्रजातंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ने संसद के निचले सदन की एक सीट जीत ली। सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के कार्यकर्ता जीत का दावा करते हुए जश्न मना रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने 45 सीटों के लिए हुए उपचुनाव का अभी कोई परिणाम घोषित नहीं किया है। म्यांमार का यह ऐतिहासिक उपचुनाव वहां सुधार की कोशिशों के लिए एक परीक्षा है। यदि पश्चिमी देश इससे संतुष्ट हुए तो मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर म्यांमार पर लगी पाबंदियां समाप्त की जा सकती हैं। एनएलडी मुख्यालय पर इसे लेकर जश्न मनाया जा रहा है कि नोबेल पुरस्कार विजेता सू ने काहमू की सीट जीत ली है। इस जीत से देश में तानाशाही के खिलाफ जारी दो दशक के संघर्ष के बाद सरकार में उनकी पहली भूमिका निभाने का रास्ता साफ हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि चुनाव निष्पक्ष हुए तो पिछले दो दशकों से मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर म्यांमार पर लगाई गई कुछ पाबंदियां हटाई जा सकती हैं। भारत और चीन जैसी उभरती वैश्विक शक्तियों की सीमा से लगे इस बदहाल देश में निवेश की संभावना बढ़ जाएगी। जनता में अत्यंत लोकप्रिय व करिश्माई नेता सू ने पिछले हफ्ते अनियमितताओं की शिकायत की थी लेकिन इसके बावजूद उनकी पार्टी 44 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस उपचुनाव को वर्ष 2015 में देश में होने वाले आम चुनाव के लिए मंच के तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है। जीत पर सू ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। सुबह से ही मतदाता स्कूलों, धार्मिक केंद्रों और सामुदायिक भवनों में बने मतदान केंद्रों में चुपचाप मतदान करने जमा हो गए थे। सू के पक्ष में मतदान करने के बाद कुछ बहुत भावुक नजर आ रहे थे। म्यांमार में हुए वर्ष 2010 में हुए आम चुनाव की दुनिया भर में हुई आलोचना के छह दिन बाद आंग सान सू को नजरबंदी से रिहा किया गया था। उसी चुनाव से 49 वर्षो से जारी सैन्य शासन की समाप्ति का रास्ता भी निकला।
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