जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली नियंत्रण
रेखा पर दो भारतीय सैनिकों की बर्बर तरीके से हत्या से आहत, आक्रोशित
और साथ ही खुद को अपमानित महसूस कर रहे देशवासियों को दिलासा देने के
लिए आखिरकार प्रधानमंत्री आगे आए, लेकिन पूरे एक हफ्ते बाद। हालांकि उन्होंने
अपेक्षाकृत कठोरता का परिचय दिया और इसके संकेत पाकिस्तानी बुजुर्गो
को वीजा अॅान अराइवल सुविधा देने के फैसले को टालने और पाकिस्तान के
नौ हॉकी खिलाडि़यों को वापस भेजने से मिले। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बर्बर
घटना के बाद पाकिस्तान से रिश्ते पहले जैसे नहीं रह सकते। मनमोहन सिंह
का बयान ऐसे समय आया है जब वायु सेनाध्यक्ष के साथ-साथ थल सेनाध्यक्ष पाकिस्तान
के खिलाफ तीखे तेवर में अपनी बात कह चुके थे। प्रधानमंत्री पर मौन
साधे रहने का ऐसा ही आरोप पिछले माह तब लगा था जब दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म
कांड के खिलाफ सारे देश में आक्रोश की लहर थी। उस समय भी उन्होंने एक
हफ्ते बाद ही राष्ट्र के नाम संदेश के जरिये अपनी चुप्पी तोड़ी थी। लांस
नायक हेमराज व सुधाकर सिंह की बर्बर हत्या के बाद जन आक्रोश को देखते हुए
कांग्रेस पार्टी और सरकार के सहयोगी दलों की ओर से भी यही सुर आए थे कि पाकिस्तान
को सख्त संदेश दिया जाना चाहिए। विपक्ष की ओर से इस भावनात्मक मुद्दे
को उठाने के प्रयासों ने भी प्रधानमंत्री को खामोशी तोड़ने को मजबूर कर
दिया। घटना के सात दिन बाद मौन तोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मामले
पर सरकार का नजरिया विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम
सिंह स्पष्ट कर चुके हैं। सेना दिवस के मौके पर सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम
सिंह के घर दावत में पहुंचे प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ 15 जनवरी
से लागू होने वाली वरिष्ठ नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल (आगमन पर वीजा)
की व्यवस्था को टालने के फैसले को जायज ठहराया। पाकिस्तान के साथ संबंध
सुधार के लिए अगुआई करते रहे प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पाक को यह
यह समझना होगा कि इस घटना के दोषियों को सजा दिया जाना जरूरी है। हालांकि
पाक के खिलाफ विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस
संबंध में सार्वजनिक तौर पर चर्चा नहीं की जा सकती। माना जा रहा है कि रियायती
वीजा समझौते का क्रियान्वयन रोककर भारत पाक को शांति प्रक्रिया से हाथ
खींचने के संकेत दे रहा है। देर शाम मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
से मुलाकात कर उन्हें सीमा पर हालात की जानकारी दी। वीजा
ऑन अराइवल व्यवस्था को ठंडे बस्ते में डालने के फैसले के बारे में पूछे
जाने पर गृह सचिव आरके सिंह ने कहा कि कुछ तकनीकी कारणों से इसे टाल दिया
गया है। दोनों देशों के बीच संबंध सुधार की कवायद में नई रियायती वीजा व्यवस्था
को अहम पड़ाव माना जा रहा था। मार्च 2013 से समूह पर्यटन वीजा लागू
किए जाने थे। बीते दिनों गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पाक के साथ वीजा
समझौते के क्रियान्वयन पर आगे बढ़ने की बात की थी। नियंत्रण रेखा पर हुई
दो भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद सैन्य व कूटनीतिक स्तर पर भारत की ओर
से दर्ज शिकायतों पर पाकिस्तान के इन्कार के रवैये ने नई दिल्ली की खीझ बढ़ा
दी है। अभी तक शांति कायम रखने पर जोर देते आ रहे विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद
ने भी कहा कि पाकिस्तान यह न समझे कि मेंढर की घटना पर भारत की शिकायतों
की अनसुनी व सीनाजोरी के बावजूद रिश्ते सामान्य गति से आगे बढ़ते रह
सकते हैं। कूटनीतिक गलियारों में इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि दोनों
देशों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया की बैठकों का सिलसिला भी लड़खड़ा
सकता है। (खार
को नागवार गुजरी जनरल बिक्रम सिंह की चेतावनी, पेज-3 प्रधानमंत्री
के कड़े तेवर का भाजपा ने श्रेय लूटा
Dainik Jagran
Naational Edition Date 16-01-2013Page-1
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