ठ्ठमाला दीक्षित, हनोई भारत
के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने वियतनाम के साथ चार दशक पुराने मैत्री
संबंधों व द्विपक्षीय संधियों को और मजबूती प्रदान की। अंसारी ने मंगलवार
को वियतनाम की उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा अन्य नेताओं से भेंट
की। वियतनाम सरकार ने दक्षिणी चीन सागर के मुद्दे पर भारतीय रुख को सही
ठहराने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता का पूर्ण समर्थन
किया। सामरिक, आर्थिक
व अन्य मुद्दों पर पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाते हुए दक्षिण पूर्व
एशियाई राष्ट्र ने भारत के साथ उद्योग व व्यापार को बढ़ावा देने के समझौता
पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए। उप राष्ट्रपति हामिद
अंसारी द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की चालीसवीं वर्षगांठ
के समापन समारोह में शामिल होने के लिए चार दिन की वियतनाम यात्रा पर
हैं। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) संजय सिंह ने बताया कि अंसारी ने वियतनाम
की उपराष्ट्रपति नगुयेन थी दुआन, प्रधानमंत्री नगुयेन तान दुंग व महासचिव
नगुयेन फू त्रोंग से भेंट की। द्विपक्षीय बैठक के
दौरान वितयनाम सरकार
ने दक्षिणी चीन सागर के मुद्दे पर चिंता जताते हुए भारतीय रुख को सही ठहराया।
भारत सागर में खोज की स्वतंत्रता के पक्ष में है, जबकि चीन इसे बाहरी
दखल मानकर विरोध कर रहा है। वियतनाम सरकार ने क्षेत्रीय शांति पर जोर देते
हुए कहा, कोई
भी विवाद दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के छह
सूत्रीय फार्मूले और 1982 के
यूएन समझौते के तहत हल होना चाहिए। अंसारी ने वियतनाम के विकास
में हरसंभव मदद जारी रखने का भरोसा दिया। इस मौके पर भारत
और वियतनाम ने छोटे-मझोले उद्योगों के क्षेत्र में सहयोग के समझौता पत्र
पर हस्ताक्षर भी किए। अंसारी बाद में हो चिन मिन की समाधि
स्थल और अन्य स्मारकों पर भी गए। शाम को अंसारी राजनयिक
संबंधों की 40वीं
वर्षगांठ के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने भारत
वियतनाम की दोस्ती का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच
व्यापार और बढ़ाए जाने पर जोर दिया। वियतनाम की उप राष्ट्रपति ने भी अपने
संबोधन में भारत की मित्रता और सहयोग की सराहना की।
Dainik Jagran
Naational Edition Date 16-01-2013Page-3
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