Wednesday, May 23, 2012

ब्रिटेन जाने वाले भारतीयों को कराना होगा टीबी टेस्ट


कैमरन सरकार ने एक नया फरमान जारी कर कहा है कि ब्रिटेन आने के ख्वाहिशमंद भारत समेत 67 देशों के नागरिकों को अब वीजा आवेदन के साथ टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) का परीक्षण कराना होगा। परीक्षण और इसके इलाज पर आने वाला खर्च भी उन्हें खुद ही वहन करना होगा। ब्रिटेन के आव्रजन मंत्री डेमियन ग्रीन ने टीबी की प्री इंट्री स्क्रीनिंग का दायरा 15 देशों के अलावा 67 अन्य देशों में लागू करने का फैसला सोमवार को सार्वजनिक किया। इससे भारत, चीन, अफगानिस्तान और नेपाल भी इसकी जद में आ गए हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान पहले ही इस सूची में थे। ब्रिटेन में बसने के ख्वाहिशमंद गैर यूरोपीय देशों के नागरिकों पर पहले ही तमाम बंदिशें लागू करने को लेकर कैमरन सरकार पर नस्लीय भावना से काम करने का आरोप लग चुका है। ग्रीन ने सफाई दी है कि इससे ब्रिटिश एयरपोर्टो पर ऐसे स्वास्थ्य परीक्षण से बचा जा सकेगा और करीब चार करोड़ पौंड की बचत हो सकेगी। हालांकि टीबी परीक्षण उन्हीं वीजा आवेदकों को कराना होगा जो छह माह से ज्यादा समय के लिए ब्रिटेन आना चाहते हैं। कम अवधि की व्यापारिक यात्रा, पर्यटन या रिश्तेदारों से मिलने के लिए वीजा चाहने वालों को ऐसे परीक्षण से नहीं गुजरना होगा। ब्रिटिश सरकार ने सफाई दी है कि यह नियम उन्हीं देशों पर लागू किया गया है जो टीबी के मामलों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की संवेदनशील देशों की सूची में शामिल हैं। ग्रीन का कहना है कि 2011 में उनके देश में टीबी के 9,000 मामले सामने आए हैं जो 30 साल में सर्वाधिक है। खास बात है कि यूरोपीय देशों को ऐसे परीक्षण के दायरे से बाहर रखा गया है। देश से बाहर रहे ब्रिटिश नागरिकों पर भी यह परीक्षण अनिवार्य नहीं किया गया है। इंपीरियल कालेज लंदन ने हालिया शोध में कहा था कि ब्रिटिश एयरपोर्ट पर टीबी परीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के निवासियों में क्षय रोग के गुप्त मामलों को नहीं खोज पाती। अगर टीबी के सर्वाधिक मामलों वाले भारतीय उपमहाद्वीप के नागरिकों का गहन परीक्षण किया जाए तो क्षय रोग के 92 फीसदी गुप्त मामलों को रोका जा सकता है।

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