Wednesday, May 23, 2012

अंगोला में जिंदगी और मौत से जूझ रहे भारतीय श्रमिक

अंगोला के सीमेंट फैक्ट्री में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की स्थिति दयनीय है। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से काम की तलाश में अंगोला गए श्रमिक ने भारत लौटने के बाद जो आपबीती सुनाई है, उससे उनकी दर्दनाक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। वेतन को लेकर उठे विवाद को लेकर अंगोला पुलिस की बर्बर कार्रवाई के बाद कई भारतीय श्रमिकों को जंगल में जाकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। भारतीय श्रमिकों में से कई अभी भी सीमेंट संयंत्र में फंसे हुए हैं। अंगोला में भारतीय श्रमिकों के त्रासदी की कहानी की शुरुआत मई के पहले सप्ताह से हुई। इस अफ्रीकी देश का सीमेंट कारखाना भारतीय मजदूरों के बल पर चलता है। वहां कार्यरत 1800 मजदूरों में से एक हजार भारतीय मूल के हैं। भारतीय मजदूरों के साथ खराब व्यवहार किए जाने तथा उन्हें कम वेतन दिए जाने से असंतोष पैदा हुआ था। नौ अप्रैल को भारतीय मजदूर संयंत्र के प्रशासनिक कार्यालय में शांतिपूर्वक एकत्र हुए और अपने वेतन तथा ओवरटाइम का भुगतान डॉलर में करने की मांग करने लगे। जिसके बाद भारतीय श्रमिकों के खिलाफ दमन की कार्रवाई शुरू हुई। अंगोला से वतन लौटे राजनगर के गोबिंदपुर गांव के 28 वर्षीय अभिराम सामल ने बताया मैं केवल भगवान के आशीर्वाद से ही जिंदा हूं, मैं स्वदेश लौटने की उम्मीद छोड़ चुका था। सामल ने बताया कि विरोध जताने के लिए हुई बैठक में मैं भी था। अचानक फैक्ट्री मालिकों ने सशस्त्र पुलिस को शांतिपूर्वक एकत्र मजदूरों पर कार्रवाई करने का हुक्म दे दिया। इसके बाद श्रमिकों पर गोलियों की बौछार हो गई। हम सभी अपनी जान बचाने के लिए भागे। करीब छह किलोमीटर तक भागने के बाद हमने खुद को एक घने जंगल में पाया। दो दिन तक हम लोग जंगल में ही रहे। इस दौरान हमलोगों ने जंगली कंदमूल खाकर झरने का पानी पीकर अपना गुजारा किया। सामल के अनुसार जंगल से लौटने के बाद कइयों को अंगोला पुलिस ने पकड़ कर जेल में डाल दिया और पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। उनके मुताबिक मैं भारतीय दूतावास अधिकारियों का अहसानमंद हूं कि उन्होंने हमारी सुरक्षित वापसी के लिए तेजी से काम किया। वहां फंसे भारतीय मजदूरों की सूची में से मेरा नाम छांटा गया। मैं उन 46 भारतीयों में शामिल था जो सरकार के त्वरित हस्तक्षेप के बाद स्वदेश लौटे हैं। दूसरी तरफ केंद्रापड़ा के जिला श्रम अधिकारी प्रदीप्त मोहंती ने बताया कि इनमें से दो श्रमिक सुरक्षित लौट आए हैं, लेकिन बहुत से प्रवासी श्रमिकों को अभी भी घर वापसी का इंतजार है। हम अंगोला में फंसे इन लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। मोहंती ने बताया कि प्रशासन के आकलन के अनुसार केंद्रपाड़ा के कम से कम 14 मजदूर अभी भी अंगोला की राजधानी लुआंडा से 600 किलोमीटर दूर सुम्बे में फंसे हैं। प्रदेश के करीब 120 मजदूरों को सुम्बे के सीमेंट संयंत्र में नौकरी मिली थी। इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी शनिवार को इस मामले में केंद्र से हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इसके बाद केंद्र भी इस समस्या को लेकर सक्रिया हुआ था।

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